
Odisha ओडिशा: बौध जिले में बिजली मीटर रीडिंग में कथित हेरफेर का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक बिजली मीटर रीडर के खिलाफ आरोप लगाया गया है कि उसने AI आधारित इमेज एडिटिंग टूल का इस्तेमाल कर मीटर की तस्वीरों में बदलाव किया और वास्तविक बिजली खपत को छिपाकर गलत बिल तैयार किए। इस कथित धोखाधड़ी से बिजली वितरण कंपनी को करीब 1.74 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान होने का दावा किया गया है।
मामले में पुलिस ने आरोपी बिजली मीटर रीडर के खिलाफ शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की पहचान रजत कुमार नायक (26) के रूप में हुई है। वह बौध जिले के पुरुनाटक पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मानिकपुर गांव का निवासी बताया जा रहा है।
आउटसोर्सिंग पर कर रहा था काम
पुलिस के अनुसार, रजत कुमार नायक टाटा पावर सदर्न ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPSODL) के साथ आउटसोर्सिंग आधार पर मीटर रीडर के रूप में काम कर रहा था। उसका काम उपभोक्ताओं के बिजली मीटर की रीडिंग लेना और उसकी तस्वीरें कंपनी के बिलिंग सिस्टम में अपलोड करना था।
आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसने कथित तौर पर तकनीक का गलत इस्तेमाल किया। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने मीटर की वास्तविक रीडिंग को बदलने के लिए AI आधारित फोटो एडिटिंग टूल का सहारा लिया।
मीटर की तस्वीरों में बदलाव का आरोप
TPSODL की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि मीटर रीडर ने बिजली मीटर की तस्वीरों को एडिट कर उनमें दिखाई देने वाली वास्तविक खपत को कम दिखाया।
कंपनी के मुताबिक, मीटर की असली रीडिंग और सिस्टम में अपलोड की गई तस्वीरों में अंतर पाया गया। जांच के दौरान संदेह हुआ कि तस्वीरों में डिजिटल तरीके से बदलाव किया गया था।
आरोप है कि गलत जानकारी के आधार पर बिजली बिल तैयार किए गए, जिससे कंपनी को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा।
कंपनी ने जांच के बाद की शिकायत
TPSODL अधिकारियों ने बताया कि नियमित जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ मीटर रीडिंग में असामान्य अंतर सामने आया। इसके बाद संबंधित डेटा और अपलोड की गई तस्वीरों की जांच की गई।
जांच में कथित तौर पर सामने आया कि कुछ तस्वीरों में छेड़छाड़ की गई थी। इसके बाद कंपनी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने कंपनी की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
AI तकनीक के गलत इस्तेमाल पर चिंता
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें पहली बार इस तरह की कथित धोखाधड़ी के लिए AI आधारित इमेज एडिटिंग तकनीक के इस्तेमाल का आरोप सामने आया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एडिटिंग टूल जहां कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रहे हैं, वहीं इनके गलत इस्तेमाल से फर्जी दस्तावेज, तस्वीरें और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का खतरा भी बढ़ गया है।
बिजली कंपनियां अब डिजिटल डेटा की जांच और सत्यापन के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जा सके।
पुलिस कर रही है आगे की जांच
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है। आरोपी से पूछताछ के अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस कथित हेरफेर में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
जांच के दौरान कंपनी के बिलिंग रिकॉर्ड, मीटर की तस्वीरें और डिजिटल डेटा की भी जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने उपभोक्ताओं के मीटर रिकॉर्ड में बदलाव किया गया और इससे कुल कितना नुकसान हुआ।
डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल
बिजली वितरण कंपनियां अब तेजी से डिजिटल बिलिंग और ऑनलाइन मीटर रीडिंग सिस्टम अपना रही हैं। इससे प्रक्रिया आसान और तेज हुई है, लेकिन इस तरह के मामलों ने डिजिटल सुरक्षा और डेटा सत्यापन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मीटर रीडिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में फोटो वेरिफिकेशन, लोकेशन ट्रैकिंग और डिजिटल ऑडिट जैसे उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है।
कंपनी ने कार्रवाई का भरोसा दिया
TPSODL अधिकारियों ने कहा है कि कंपनी उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी बिजली बिल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि किसी कर्मचारी या एजेंसी से जुड़े व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपी ने कितने समय से यह कथित गड़बड़ी की और इससे कंपनी को वास्तविक रूप से कितना नुकसान हुआ।





