
भुवनेश्वर। ओडिशा में एक बार फिर भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को बताया कि अगले 24 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का नया क्षेत्र बनने की संभावना है। मौसम प्रणाली के सक्रिय होने से राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग के अनुसार, इस नई मौसम प्रणाली के बनने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। मध्य म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में एक नया चक्रवाती परिसंचरण बना है। शनिवार को यह चक्रवाती परिसंचरण पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटों के पास उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय बताया गया। इसके प्रभाव से अगले 24 घंटों में इसी क्षेत्र के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
24 घंटे में बन सकता है कम दबाव का क्षेत्र
IMD ने अपने मौसम बुलेटिन में बताया कि मध्य म्यांमार के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के पश्चिम की ओर बढ़ने और समुद्री क्षेत्र में सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से उत्तरी बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बनने वाली ऐसी मौसमी प्रणालियों का सीधा प्रभाव ओडिशा के मौसम पर पड़ता है। कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद इसके प्रभाव से राज्य में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। खासकर तटीय और उत्तरी ओडिशा के जिलों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्योंझर और मयूरभंज में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने 24 से 28 अगस्त के बीच क्योंझर और मयूरभंज जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों के लिए ऑरेंज वॉर्निंग जारी की गई है।
भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। निचले इलाकों में जलभराव, छोटी नदियों और नालों में पानी बढ़ने तथा सड़क यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश होने पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।
पहले से बारिश से प्रभावित है राज्य
ओडिशा के कई हिस्सों में हाल के दिनों में बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में नए कम दबाव के क्षेत्र की संभावना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में यदि दोबारा तेज बारिश होती है तो राहत और बचाव कार्यों के सामने नई चुनौती पैदा हो सकती है।
राज्य में मौसम की स्थिति पर प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की नजर बनी हुई है। नदियों के जलस्तर, निचले इलाकों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण चेतावनी
भारी बारिश का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। जिन इलाकों में पहले से खेतों में पानी जमा है, वहां अतिरिक्त बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। दूसरी ओर, बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में यह वर्षा कृषि गतिविधियों के लिए उपयोगी भी साबित हो सकती है।
किसानों को मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी जा सकती है। अत्यधिक बारिश की स्थिति में कटाई या अन्य कृषि कार्यों को लेकर भी स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
कई जिलों में बढ़ सकती है बारिश
कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद राज्य के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। हालांकि बारिश की तीव्रता और इसका क्षेत्र मौसम प्रणाली की स्थिति और उसकी दिशा पर निर्भर करेगा।
IMD लगातार इस मौसम प्रणाली पर नजर रख रहा है। आने वाले दिनों में इसके स्थान, तीव्रता और संभावित प्रभाव को लेकर मौसम विभाग की ओर से नए अपडेट जारी किए जाएंगे। लोगों को भी आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत
भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए जिला प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतनी होगी। बाढ़ संभावित क्षेत्रों, नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम की जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
आपदा की स्थिति में राहत सामग्री, बचाव दल और आवश्यक संसाधनों को तैयार रखने से किसी भी आपात स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से क्योंझर और मयूरभंज में ऑरेंज वॉर्निंग के दौरान स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाना जरूरी होगा।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी बंगाल की खाड़ी में अगले 24 घंटों के दौरान बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा में बारिश की गतिविधियों को फिर बढ़ा सकता है। 24 से 28 अगस्त के बीच क्योंझर और मयूरभंज में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज वॉर्निंग जारी की गई है। ऐसे में प्रशासन के साथ आम लोगों को भी मौसम के बदलते मिजाज को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।





