
Odisha ओडिशा: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लंबे समय के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा तट के पास मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। विभाग के अनुसार ऊपरी हवा में एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है, जिसके प्रभाव से 3 जुलाई के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार IMD-GFS, NCEP-GFS, NCMRWF मिथुन और ECMWF सहित अधिकांश न्यूमेरिकल मौसम पूर्वानुमान मॉडल इस संभावित बदलाव की पुष्टि कर रहे हैं। इन मॉडलों के अनुसार ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण 2 जुलाई के आसपास बनने की संभावना है, जिसके बाद 3 या 4 जुलाई के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसमीय प्रणाली बनने के बाद धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकती है। जैसे-जैसे यह सिस्टम जमीन के करीब पहुंचेगा, इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना भी जताई जा रही है। NCEP-GFS और ECMWF मॉडल के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में यह कम दबाव का क्षेत्र और अधिक सक्रिय होकर मौसम को प्रभावित कर सकता है।
मौसम पूर्वानुमान में शामिल एनसेंबल मॉडल जैसे GEFS और मिथुन एनसेंबल सिस्टम भी इस संभावना का समर्थन कर रहे हैं कि उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक संगठित कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है। इन मॉडलों का संकेत है कि यह प्रणाली धीरे-धीरे संगठित होकर मौसम पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मौसम मॉडल भी इस संभावित बदलाव की पुष्टि कर रहे हैं। मिथुन मॉडल का उपयोग करने वाले Pangu Weather और GraphCast जैसे AI मॉडल ने भी अनुमान लगाया है कि 3 जुलाई के आसपास उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है।
इन AI मॉडलों के अनुसार, यह प्रणाली 4 जुलाई तक और अधिक मजबूत हो सकती है। इसके बाद 5 जुलाई के आसपास यह उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक डिप्रेशन (कम दबाव का गहरा क्षेत्र) में बदल सकती है। हालांकि FourCastNet मॉडल इस प्रवृत्ति से कुछ अलग संकेत देता है, लेकिन अधिकांश मॉडल इस सिस्टम के विकसित होने और मजबूत होने की संभावना का समर्थन करते हैं।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समुद्री प्रणालियां मानसून की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। उत्तर बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आसपास के तटीय इलाकों में बारिश की तीव्रता बढ़ा सकता है। इससे समुद्र में भी स्थिति प्रभावित हो सकती है और मछुआरों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा सकती है।
IMD ने अभी इस प्रणाली को प्रारंभिक चरण में बताया है, लेकिन लगातार मॉडल विश्लेषण से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में मौसम तेजी से बदल सकता है। विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की अपडेट समय-समय पर जारी की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह सिस्टम अपेक्षित रूप से विकसित होता है तो यह क्षेत्रीय मौसम पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। खासकर तटीय राज्यों में भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्री गतिविधियों में बदलाव की संभावना बढ़ सकती है।
फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे आधिकारिक मौसम अपडेट पर ध्यान दें और किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा न करें। आने वाले दिनों में इस सिस्टम की प्रगति पर सभी की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यह मानसून गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक साबित हो सकता है।





