ओडिशा

बंगाल की खाड़ी में बन रहा खतरनाक चक्रवाती तूफान, 26 अक्टूबर तक तेज होने की आशंका

Kavita2
23 Oct 2026 12:25 PM IST
बंगाल की खाड़ी में बन रहा खतरनाक चक्रवाती तूफान, 26 अक्टूबर तक तेज होने की आशंका
x

भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसमी प्रणाली के कारण देश के पूर्वी तटीय राज्यों में चक्रवाती तूफान का खतरा बढ़ गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को जारी अपने ताजा बुलेटिन में बताया है कि बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अगले तीन दिनों में और शक्तिशाली होकर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 26 अक्टूबर की सुबह तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान बनने की संभावना है। इसके बाद यह प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए उत्तरी आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिणी ओडिशा के तटीय इलाकों की ओर बढ़ सकती है। संभावित तूफान के कारण आने वाले दिनों में तेज बारिश, आंधी और समुद्र में ऊंची लहरों की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।

बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र

मौसम विभाग के शुक्रवार सुबह जारी बुलेटिन के अनुसार, सुबह 5:30 बजे पूर्व-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र मौजूद था।

इस मौसमी प्रणाली के अगले कुछ दिनों में लगातार मजबूत होने की संभावना जताई गई है।

आईएमडी के अनुसार, कम दबाव का यह क्षेत्र 24 अक्टूबर तक डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके बाद 25 अक्टूबर तक इसके और शक्तिशाली होकर डीप डिप्रेशन बनने की संभावना है।

यदि अनुकूल समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो 26 अक्टूबर की सुबह तक यह चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

मौसम विभाग इस पूरी प्रणाली की गतिविधियों और उसकी दिशा पर लगातार निगरानी रख रहा है।

26 अक्टूबर तक चक्रवाती तूफान बनने का अनुमान

आईएमडी ने इस मौसमी प्रणाली के मजबूत होने की संभावित समयरेखा भी जारी की है।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में चिंता

मौसम विभाग ने बताया है कि संभावित चक्रवात 26 अक्टूबर के बाद अगले दो दिनों में उत्तरी आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिणी ओडिशा के तटों की ओर बढ़ सकता है।

इससे आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय जिलों और ओडिशा के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में मौसम प्रभावित होने की संभावना है।

तूफान के प्रभाव से तेज हवाएं, भारी बारिश और समुद्र में उथल-पुथल जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

इस दौरान निचले इलाकों में जलभराव और तटीय क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती है।

हालांकि, मौसम विभाग के अगले बुलेटिन से ही स्पष्ट होगा कि किन जिलों में अधिक बारिश होने और तेज हवाएं चलने का खतरा रहेगा।

ओडिशा में 25 अक्टूबर के बाद बढ़ सकती है बारिश

ओडिशा के क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने पहले ही संकेत दिया था कि 25 अक्टूबर तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है।

इसके बाद बंगाल की खाड़ी में बन रही प्रणाली के प्रभाव से 27 अक्टूबर के आसपास कुछ इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र की प्रमुख मनोरमा मोहंती के अनुसार, इस मौसमी प्रणाली की वास्तविक दिशा और संभावित प्रभाव के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी इसके विकसित होने के बाद मिलेगी।

मौसम विभाग ने लगातार बदल रही परिस्थितियों पर नजर रखने की आवश्यकता बताई है।

समुद्र में बढ़ सकती है हलचल

बंगाल की खाड़ी में बन रही चक्रवाती प्रणाली के कारण समुद्री परिस्थितियों में भी बदलाव होने की संभावना है।

जैसे-जैसे कम दबाव का क्षेत्र मजबूत होगा, समुद्र के कुछ हिस्सों में हवाओं की रफ्तार और लहरों की ऊंचाई बढ़ सकती है।

ऐसी परिस्थितियां मछली पकड़ने वाली नौकाओं और छोटे समुद्री जहाजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

मछुआरों को समुद्र में जाने से पहले मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की नवीनतम सलाह का पालन करना चाहिए।

इसके अलावा पहले से समुद्र में मौजूद नौकाओं के लिए भी बदलती मौसम परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त करना जरूरी है।

आईएमडी के समुद्री मौसम बुलेटिन में भी बंगाल की खाड़ी की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है।

तूफान बनने के बाद मिल सकता है नाम

मौसम विभाग के अनुसार, यदि बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही प्रणाली चक्रवाती तूफान में बदलती है, तो इसका नाम 'अरनब' (Arnab) रखा जा सकता है।

यह नाम बांग्लादेश की ओर से प्रस्तावित किया गया है।

उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन की स्वीकृत सूची के अनुसार रखे जाते हैं।

हालांकि, अभी यह मौसमी प्रणाली कम दबाव के क्षेत्र के रूप में मौजूद है। इसे औपचारिक रूप से चक्रवाती तूफान घोषित किए जाने के बाद ही नाम लागू होगा।

डिप्रेशन और चक्रवाती तूफान में क्या अंतर?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र अनुकूल परिस्थितियों में धीरे-धीरे अधिक शक्तिशाली हो सकता है।

जब इस प्रणाली के आसपास हवाओं की गति बढ़ती है, तो इसे डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन की श्रेणी में रखा जा सकता है।

इसके बाद हवाओं की निरंतर गति 62 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक होने पर इसे चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा जाता है।

चक्रवाती तूफान बनने के बाद उसकी तीव्रता के आधार पर आगे की श्रेणियां निर्धारित की जाती हैं।

यही कारण है कि मौसम विभाग लगातार समुद्र की सतह के तापमान, वायुदाब, हवाओं की दिशा और अन्य परिस्थितियों का अध्ययन करता है।

तटीय इलाकों में सुरक्षा उपाय जरूरी

चक्रवाती तूफान की आशंका को देखते हुए प्रभावित होने की संभावना वाले क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

विशेष रूप से समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों, मछुआरों और निचले इलाकों में बसे परिवारों के लिए मौसम संबंधी चेतावनियां महत्वपूर्ण होती हैं।

तेज हवाओं के दौरान कमजोर संरचनाओं, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास सावधानी बरतना जरूरी होता है।

भारी बारिश होने पर सड़कों और निचले इलाकों में पानी भर सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।

फिलहाल संभावित तूफान के तट से टकराने की निश्चित तारीख, स्थान या नुकसान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

अगले 48 से 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही प्रणाली के लिए 24 से 26 अक्टूबर का समय महत्वपूर्ण रहने वाला है।

इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि कम दबाव का क्षेत्र कितनी तेजी से मजबूत हो रहा है और चक्रवाती तूफान का रूप लेता है या नहीं।

इसके बाद 27 और 28 अक्टूबर के दौरान उत्तरी आंध्र प्रदेश तथा दक्षिणी ओडिशा के तटों की ओर इसकी संभावित गतिविधियों पर विशेष नजर रहेगी।

आईएमडी आने वाले दिनों में तूफान की दिशा, गति, तीव्रता और संभावित वर्षा को लेकर नए बुलेटिन जारी करेगा।

फिलहाल मौसम विभाग ने चक्रवाती तूफान बनने की संभावना जताई है, लेकिन तूफान के तट से टकराने का स्थान और समय अभी निश्चित नहीं है। ऐसे में तटीय क्षेत्रों के लोगों को अफवाहों से बचते हुए मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए।

Next Story