ओडिशा

मलकानगिरी में बाढ़ से 58 गांव प्रभावित, 1,154 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

Kavita2
25 Sept 2026 11:15 AM IST
मलकानगिरी में बाढ़ से 58 गांव प्रभावित, 1,154 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
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मलकानगिरी। ओडिशा के मलकानगिरी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। जिले के कई निचले इलाके पानी में डूब गए हैं, जबकि कई पुलों के ऊपर से बाढ़ का पानी बहने के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रशासन के मुताबिक जिले के छह ब्लॉकों के कुल 58 गांव बारिश और बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि अब तक 1,154 लोगों को निचले और जोखिम वाले इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

लगातार बारिश से जिले की नदियों, नालों और अन्य जल स्रोतों का जलस्तर बढ़ गया है। कई इलाकों में पानी सड़कों और पुलों के ऊपर पहुंच गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

खबरों के अनुसार पटेरू, कंकरकुंडा, MV-90 और MV-96 के पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है। इन पुलों पर पानी आने के कारण संबंधित मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है। तेज बहाव को देखते हुए ऐसे रास्तों से गुजरना जोखिमपूर्ण हो सकता है। कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने से लोगों को वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

मलकानगिरी में कई महत्वपूर्ण सड़कें छोटी-बड़ी नदियों और नालों पर बने पुलों से होकर गुजरती हैं। बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने पर इन पुलों के ऊपर पानी बहने लगता है। इससे कई गांवों और पंचायतों का जिला या ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो सकता है। मौजूदा बारिश के कारण भी ऐसी ही स्थिति कई स्थानों पर बनी हुई है।

निचले इलाकों में हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। लगातार बारिश और आसपास के जल स्रोतों का स्तर बढ़ने से पानी रिहायशी क्षेत्रों में प्रवेश कर गया है। कई घरों के अंदर तक बारिश और बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे घरेलू सामान और खाद्यान्न के नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है।

स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। अब तक 1,154 लोगों को प्रभावित इलाकों से निकाला गया है। प्रशासन की ओर से राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां विस्थापित लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

राहत शिविरों में लोगों के लिए भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित परिवारों को जरूरी सुविधाओं की कमी न हो। बाढ़ की स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर राहत शिविरों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।

जिला प्रशासन के अनुसार छह ब्लॉकों के 58 गांव बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों से लगातार जानकारी जुटा रही हैं। यदि बारिश जारी रहती है और जलस्तर बढ़ता है तो प्रभावित गांवों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को तेज किया गया है। जिन इलाकों में सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल हो रहा है, वहां स्थिति के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है। प्रशासन की प्राथमिकता ऐसे परिवारों को सुरक्षित निकालना है, जिनके घर पानी से घिर गए हैं या जहां जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने से मिट्टी की दीवारें कमजोर हो सकती हैं। ऐसे घरों में रहने वाले परिवारों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना जरूरी हो गया है।

बाढ़ के दौरान बिजली व्यवस्था को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है। जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के तार, खंभे और उपकरण खतरा पैदा कर सकते हैं। प्रभावित इलाकों में प्रशासन और संबंधित विभागों को ऐसी जगहों की निगरानी करनी पड़ रही है।

मलकानगिरी का बड़ा हिस्सा पहाड़ी, वन और नदी-नालों वाले क्षेत्रों में फैला हुआ है। भारी बारिश के दौरान यहां कई मार्गों पर तेजी से पानी भर जाता है। निचले पुलों और पुलियों के ऊपर पानी बहने से सड़क संपर्क सबसे पहले प्रभावित होता है। इसी वजह से बारिश के दौरान दूरदराज के गांवों तक राहत पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

पटेरू, कंकरकुंडा, MV-90 और MV-96 के पुलों की स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है। पानी कम होने के बाद ही इन मार्गों पर सामान्य यातायात सुरक्षित तरीके से शुरू किया जा सकेगा। तेज बहाव के बीच पुल पार करने का प्रयास गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। बाढ़ का पानी कुओं, हैंडपंपों और अन्य पेयजल स्रोतों को दूषित कर सकता है। इसी कारण राहत शिविरों में पीने के पानी की अलग व्यवस्था की गई है। बारिश और बाढ़ लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में जलजनित बीमारियों से बचाव के उपाय भी जरूरी होंगे।

बाढ़ से कृषि क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की आशंका है। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है। हालांकि कृषि नुकसान की वास्तविक स्थिति पानी कम होने के बाद किए जाने वाले आकलन से स्पष्ट होगी।

जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए लगाया गया है। जलस्तर, सड़क संपर्क और गांवों की स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है।

फिलहाल मलकानगिरी में लगातार बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। छह ब्लॉकों के 58 गांव प्रभावित बताए गए हैं और 1,154 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। कई पुलों के ऊपर से पानी बहने और निचले इलाकों में घरों तक पानी पहुंचने के बीच प्रशासन ने राहत अभियान तेज कर दिया है। बारिश और जलस्तर में कमी आने तक प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बनाए रखने की जरूरत है।

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