
संबलपुर। ओडिशा के हीराकुंड बांध में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने पानी का डिस्चार्ज बढ़ाने का फैसला किया है। ओडिशा जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप कुमार राउत ने बताया कि जलाशय में पानी का प्रवाह लगातार बढ़ने के कारण शुक्रवार शाम तक बांध के खुले गेटों की संख्या 14 से बढ़ाकर 22 कर दी जाएगी।
राउत ने बाढ़ की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल हीराकुंड बांध के 14 गेटों से करीब 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। 22 गेट खोलने के बाद बांध से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़कर लगभग 3.5 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि जलाशय में लगातार हो रही पानी की आवक को नियंत्रित करने और बांध की सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। बांध प्रबंधन जलस्तर और पानी के प्रवाह की लगातार निगरानी कर रहा है।
हीराकुंड बांध महानदी नदी पर बना देश के प्रमुख बहुउद्देशीय बांधों में से एक है। मानसून के दौरान जलाशय में पानी की आवक बढ़ने पर जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर गेट खोले जाते हैं। इसका उद्देश्य बांध पर अतिरिक्त दबाव को कम करना और संभावित खतरे को टालना होता है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बांध से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी के निचले क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ सकता है। इसे देखते हुए संबंधित जिलों के प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
ओडिशा में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण कई नदियों में जलस्तर बढ़ा है। महानदी में भी पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन पहले से ही निगरानी कर रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि बांध से पानी छोड़ने के फैसले से पहले निचले इलाकों की स्थिति, नदी के प्रवाह और मौसम की परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है। सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय प्रशासन को लोगों को सतर्क करने और संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने को कहा गया है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन की सलाह का पालन करें और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बड़े जलाशयों का संचालन बेहद सावधानी से किया जाता है। अधिक पानी जमा होने से बांध पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जाता है।
हीराकुंड बांध से पानी छोड़े जाने का असर महानदी के प्रवाह पर पड़ता है। ऐसे में कटक, पुरी, जगतसिंहपुर और अन्य निचले क्षेत्रों में प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।
राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और जलस्तर के अनुसार आगे के फैसले लिए जाएंगे।
बांध के 22 गेट खोलने के बाद पानी का बहाव बढ़ने से नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल हीराकुंड बांध में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल निकासी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। विभाग का कहना है कि जलाशय की सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण के लिए स्थिति की हर घंटे समीक्षा की जा रही है।





