
भुवनेश्वर। ओडिशा में बुधवार को कई स्थानों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। नबा निर्माण कृषक संगठन यानी NNKS ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर 12 घंटे के राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। बंद सुबह 6 बजे से शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। संगठन ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन करने की अपील की है और साफ किया है कि आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित नहीं किया जाएगा।
बंद के दौरान कई इलाकों में संगठन से जुड़े कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर सड़क यातायात प्रभावित हुआ और वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा। संगठन ने दुकानदारों से भी प्रतिष्ठान बंद रखने और आम लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है।
NNKS की प्रमुख मांगों में स्कूल और जन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। संगठन ने कक्षा 1 से 8 तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों को लेकर नाराजगी जताई है। संगठन का आरोप है कि पाठ्यपुस्तकों में हुई गलतियों के लिए स्कूल और जन शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
किसान संगठन ने कहा है कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी पुस्तकों में गलतियां गंभीर मामला है। उनका कहना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शुरुआती कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सही और प्रमाणित सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किताबों में गलत तथ्य या त्रुटियां होंगी तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा।
संगठन ने इस मुद्दे को लेकर विभागीय जवाबदेही तय करने की मांग की है। NNKS का कहना है कि केवल किताबों में सुधार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसी गलतियां किस स्तर पर हुईं और जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
छह सूत्रीय मांगों में शिक्षकों के खाली पदों को जल्द भरने की मांग भी शामिल है। संगठन का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में पद खाली रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में एक शिक्षक पर कई कक्षाओं की जिम्मेदारी होने से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
NNKS ने राज्य सरकार से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होंगे तभी शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सकेगी और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल पाएगा।
बंद के दौरान संगठन ने समर्थकों से किसी तरह की हिंसा या जबरदस्ती से बचने को कहा है। NNKS ने स्पष्ट किया कि अस्पताल, एंबुलेंस, दवा दुकानें, अग्निशमन और अन्य जरूरी सेवाओं को बंद से बाहर रखा जाए। इसका उद्देश्य सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना है, न कि आम लोगों को परेशान करना।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में बंद का असर अलग-अलग स्तर पर देखने को मिला। कुछ स्थानों पर दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं, जबकि कई जगह व्यापारियों ने बंद का समर्थन करते हुए प्रतिष्ठान बंद रखे। बसों और अन्य यात्री वाहनों की आवाजाही भी कुछ इलाकों में प्रभावित हुई।
यात्रियों को सुबह के समय सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ स्थानों पर सड़क पर प्रदर्शन के कारण वाहनों की कतारें लग गईं। स्थानीय प्रशासन ने यातायात व्यवस्था बनाए रखने और किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की तैनाती की।
पुलिस और जिला प्रशासन ने बंद को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती। प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड और सरकारी कार्यालयों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने को कहा गया।
NNKS लंबे समय से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाता रहा है। इस बार संगठन ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को भी अपनी मांगों में प्रमुखता दी है। पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों और शिक्षक पदों की कमी को लेकर संगठन सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
संगठन का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की बड़ी संख्या गरीब और ग्रामीण परिवारों से आती है। ऐसे में यदि किताबों में गलतियां हों या पर्याप्त शिक्षक न हों तो इसका सबसे अधिक नुकसान इन्हीं परिवारों के बच्चों को होता है।
राज्यव्यापी बंद के जरिए NNKS सरकार से अपनी छह सूत्रीय मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई चाहता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
हालांकि बंद के दौरान प्रशासन की प्राथमिकता सामान्य जनजीवन और आपात सेवाओं को बनाए रखने पर रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और आम लोगों से सहयोग की अपील की।
बुधवार सुबह से शुरू हुआ यह बंद शाम 6 बजे तक जारी रहने वाला है। दिनभर के प्रदर्शन और बंद के बाद संगठन आगे की रणनीति पर निर्णय ले सकता है। फिलहाल ओडिशा के कई हिस्सों में बंद का असर यातायात, बाजार और सामान्य गतिविधियों पर दिखाई दिया।
NNKS की छह मांगों में शिक्षा से जुड़े मुद्दे केंद्र में हैं। संगठन की ओर से स्कूल और जन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग ने राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार संगठन की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और पाठ्यपुस्तकों की कथित गलतियों तथा शिक्षक भर्ती के मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।





