
भुवनेश्वर: 43 साल पुराने एक निजी दावे को खत्म करते हुए, राजस्व बोर्ड (बोर्ड ऑफ रेवेन्यू) ने कटक शहर के एक प्रमुख इलाके में 62.72 एकड़ जमीन पर राज्य के स्वामित्व को बरकरार रखा है।
यह जमीन कटक नगर निगम के अंतर्गत आने वाली तांगी-चौद्वार तहसील में स्थित है और इसकी कीमत लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है।
राजस्व बोर्ड के सदस्य सत्यब्रत साहू ने यह आदेश सुनाया और 'ओडिशा एस्टेट्स एबोलिशन (OEA) एक्ट, 1951' की धारा 38-B के तहत दायर एक पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) को खारिज कर दिया।
यह कार्यवाही 2006 में दायर एक रिट याचिका पर ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शुरू की गई थी। 2022 से 2026 के बीच इस मामले की 26 अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं ने इस जमीन पर स्वामित्व और किरायेदारी के अधिकारों का दावा किया था। उनका आधार 1945 में एक निजी व्यक्ति के पक्ष में तैयार किया गया कथित पंजीकृत पट्टा (लीज डीड) था, जो जूट मिल लगाने के लिए दिया गया था। बताया जाता है कि यह पट्टा पूर्व मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) काली कृष्ण सरकार की विधवा, चंदन बिलासनी दासी द्वारा दिया गया था। उन्होंने अपने दावे को साबित करने के लिए बाद के बंदोबस्त (सेटलमेंट) और चकबंदी (कंसोलिडेशन) रिकॉर्ड का भी हवाला दिया था।





