
कटक: ओडिशा हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह मई से पारादीप एंकरेज पर कैमरून के झंडे वाले क्रूड ऑयल टैंकर MT यूनिटी पर फंसे 23 क्रू सदस्यों (जिनमें 20 रूसी नागरिक शामिल हैं) को जहाज से उतारने और उन्हें वापस भेजने के लिए तुरंत इंतज़ाम करे।
6 अक्टूबर को दिए गए एक आदेश में, जस्टिस आरके पटनायक ने कहा कि मर्चेंट शिपिंग एक्ट के तहत यह जहाज़ 'लावारिस जहाज़' (abandoned vessel) की श्रेणी में आता है, क्योंकि इसका मालिक क्रू के प्रति अपनी कानूनी ज़िम्मेदारियां पूरी करने में नाकाम रहा है। बंकर फ्यूल (जहाज़ का ईंधन) का बकाया भुगतान न करने से जुड़े समुद्री विवादों के कारण कोर्ट के आदेश पर यह जहाज़ अभी भी ज़ब्त है।
कोर्ट MT यूनिटी के मास्टर इस्त्यागिन एवगेनी निकोलायेविच की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। महीनों से फंसे इन क्रू सदस्यों को कथित तौर पर खाने-पीने के पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतों के बिना छोड़ दिया गया था।
जस्टिस पटनायक ने कहा कि क्रू को "समुद्री दावों के निपटारे तक अनिश्चित काल के लिए लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता"। उन्होंने इस दलील को खारिज कर दिया कि उनकी जगह दूसरे लोगों को लाने और उन्हें वापस भेजने का काम जहाज़ के मालिक, अनुबंध करने वाली पार्टियों या बीमा कंपनी पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार, शिपिंग मास्टर (कोलकाता), मर्केंटाइल मरीन डिपार्टमेंट (कोलकाता) और मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन के डायरेक्टर जनरल (महाराष्ट्र) को "तुरंत स्थिति को संभालने" का निर्देश देते हुए, जस्टिस पटनायक ने बिना किसी देरी के क्रू को जहाज़ से उतारने, उनकी जगह दूसरे लोगों को लाने और उन्हें वापस भेजने का इंतज़ाम करने का आदेश दिया।





