
Nagaland नागालैंड: नागालैंड के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र दीमापुर में प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड-क्लास रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइज़ेशन (CSOs) ने अपना समर्थन व्यक्त किया है। इसके साथ ही संगठनों ने अधिकारियों से भूमि से जुड़े लंबित विवादों को जल्द सुलझाने की अपील की है, ताकि परियोजना में किसी प्रकार की देरी न हो।
यह समर्थन नागा काउंसिल दीमापुर (NCD) द्वारा विभिन्न CSOs और जनजातीय संगठनों के साथ आयोजित एक परामर्श बैठक के दौरान सामने आया। बैठक का उद्देश्य प्रस्तावित स्टेशन उन्नयन परियोजना पर चर्चा करना और स्थानीय समुदायों की राय लेना था। बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से इस विकास योजना का समर्थन किया और यह भी कहा कि दीमापुर रेलवे स्टेशन को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के किसी भी सुझाव का वे विरोध करते हैं।
Naga Council Dimapur के अध्यक्ष के. जी. केन्ये ने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि परियोजना के पहले चरण में लगभग 7.3 एकड़ भूमि शामिल है। हालांकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि भूमि स्वामित्व से जुड़े विवाद इस परियोजना के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
केन्ये के अनुसार, कुल 96 पट्टा धारकों से जुड़े भूमि विवाद अभी तक पूरी तरह हल नहीं हो पाए हैं। इनमें से 38 पट्टा धारकों ने मामले को अदालत में चुनौती दी है, जिससे कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचने की आशंका बढ़ गई है। उनका कहना था कि यदि इन विवादों का समय पर समाधान नहीं किया गया तो यह न केवल परियोजना को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भविष्य में इसे नागालैंड से बाहर स्थानांतरित किए जाने की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
बैठक में यह भी कहा गया कि प्रारंभिक चरण के लिए भूमि सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण आगे की प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है। CSOs और जनजातीय संगठनों ने प्रशासन से आग्रह किया कि भूमि विवादों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए, ताकि रेलवे आधुनिकीकरण परियोजना समय पर आगे बढ़ सके।
प्रतिनिधियों ने यह भी जोर दिया कि दीमापुर रेलवे स्टेशन न केवल नागालैंड बल्कि पूरे नॉर्थईस्ट क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र है। ऐसे में इसके आधुनिकीकरण से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
केन्ये ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शुरुआती चरण में ही इन विवादों का समाधान नहीं किया गया, तो परियोजना की गति पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने वाले मुद्दों को संवाद और समाधान के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय संगठन विकास के पक्ष में हैं, लेकिन भूमि विवादों का समाधान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।





