नागालैंड

कोहिमा में गूंजा विरोध का स्वर प्रस्तावित कानून बदलाव पर उठे सवाल

nidhi
13 Sept 2026 12:54 PM IST
कोहिमा में गूंजा विरोध का स्वर प्रस्तावित कानून बदलाव पर उठे सवाल
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FCRA बदलावों को लेकर विरोध
नागालैंड : कोहिमा में प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधनों के खिलाफ हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से इन बदलावों पर पुनर्विचार करने की मांग की और कहा कि इससे कई सामाजिक संगठनों और संस्थाओं के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
प्रदर्शन में विभिन्न नागरिक संगठनों, चर्च समूहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और अपनी चिंताओं को सामने रखा।
संशोधनों को लेकर जताई चिंता
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि FCRA में प्रस्तावित बदलावों से गैर सरकारी संगठनों (NGO) और सामाजिक संस्थाओं के लिए विदेशी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया और अधिक कठिन हो सकती है। उनका तर्क है कि कई संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं और ऐसे नियमों से उनके कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं सरकार का पक्ष है कि FCRA से जुड़े नियमों का उद्देश्य विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह के गलत इस्तेमाल को रोकना है।
कोहिमा में बड़ी संख्या में जुटे लोग
कोहिमा में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और सरकार से संवाद की अपील की।
आयोजकों ने कहा कि यह मुद्दा केवल किसी एक संगठन का नहीं है, बल्कि उन सभी संस्थाओं से जुड़ा है जो समाज कल्याण के लिए काम करती हैं।
FCRA का महत्व
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) भारत में विदेशी धन प्राप्त करने वाली संस्थाओं को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके तहत संगठनों को विदेशी योगदान लेने और उसका इस्तेमाल करने के लिए नियमों का पालन करना होता है।
सरकार समय-समय पर इस कानून में बदलाव करती रही है ताकि विदेशी फंडिंग की निगरानी और पारदर्शिता को मजबूत किया जा सके।
आगे की रणनीति पर नजर
प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि प्रस्तावित संशोधनों पर सभी पक्षों से चर्चा की जाए और ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे सामाजिक संस्थाओं का काम प्रभावित न हो।
फिलहाल कोहिमा में हुए इस प्रदर्शन ने FCRA संशोधनों को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा बढ़ने की संभावना है।
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