नागालैंड

नागालैंड में FCRA बदलाव का विरोध, राजनीतिक दलों ने मांगी मोहलत

nidhi
13 Aug 2026 1:26 PM IST
नागालैंड में FCRA बदलाव का विरोध, राजनीतिक दलों ने मांगी मोहलत
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नागालैंड की राजनीति में FCRA मुद्दा, केंद्र से पुनर्विचार की अपील
कोहिमा : नागालैंड के राजनीतिक दलों और नेताओं ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधनों को फिलहाल टालने और इस पर व्यापक चर्चा कराने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि नए प्रावधानों को लागू करने से पहले सभी हितधारकों की चिंताओं को समझना जरूरी है।
नागालैंड के लोकसभा सांसद एस. सुपोंगमेरेन जमीर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि FCRA संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने से पहले इसे स्थगित किया जाए और सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाए। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की सामाजिक और विकास संबंधी परिस्थितियां अन्य क्षेत्रों से अलग हैं, इसलिए कानून बनाने से पहले व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।
राज्य के राजनीतिक नेतृत्व ने आशंका जताई है कि प्रस्तावित बदलावों का असर उन संस्थाओं पर पड़ सकता है जो विदेशी सहायता के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। नेताओं का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन नियमों में बदलाव करते समय जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर FCRA संशोधनों की समीक्षा और अधिक संसदीय जांच की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न संगठनों और समुदायों की ओर से उठाई गई चिंताओं को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। FCRA कानून भारत में विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों, संस्थानों और अन्य संगठनों के लिए नियम निर्धारित करता है। केंद्र सरकार का तर्क है कि संशोधनों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत इस्तेमाल को रोकना है। वहीं विरोध करने वाले दलों और संगठनों का कहना है कि नए प्रावधानों से सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर देश के अन्य हिस्सों से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई नेताओं ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने या व्यापक बहस के बाद आगे बढ़ाने की मांग की है। केंद्र सरकार ने विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया है। नागालैंड में FCRA संशोधन को लेकर राजनीतिक दलों की चिंता मुख्य रूप से राज्य की सामाजिक संरचना, धार्मिक और गैर-सरकारी संस्थाओं की भूमिका तथा विकास कार्यों पर संभावित प्रभाव को लेकर है। नेताओं का कहना है कि किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले सभी पक्षों की सहमति और स्पष्टता जरूरी है।
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