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गुवाहाटी: 30 से ज़्यादा शिक्षाविदों, पत्रकारों, विद्वानों, लेखकों, कलाकारों और जागरूक नागरिकों ने 15 सितंबर को नई दिल्ली में नागालैंड हाउस में प्रोफ़ेसर डॉली किकॉन और संजय बारबोरा के कथित अपमान और डराने-धमकाने की घटना की नागालैंड सरकार से जांच की मांग की है।
16 सितंबर को जारी एक बयान में, हस्ताक्षर करने वालों ने नागालैंड हाउस के अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यवहार की पारदर्शी जांच और दोनों शिक्षाविदों से बिना शर्त माफ़ी मांगने की मांग की।
नागा स्कॉलर्स एसोसिएशन ने किकॉन को अपनी डॉक्यूमेंट्री 'अ सेक्रेड प्लेस' (A Sacred Place) दिखाने और छात्रों व विद्वानों के साथ बातचीत करने के लिए आमंत्रित किया था। यह कार्यक्रम आरके पुरम स्थित नागालैंड हाउस के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित किया गया था और इसके बाद फिल्म निर्माता के साथ बातचीत का सत्र हुआ।
बयान के अनुसार, कार्यक्रम के बाद छात्र और विद्वान रिसेप्शन एरिया के पास किकॉन से बातचीत कर रहे थे, तभी नागालैंड हाउस के एक कर्मचारी ने उन्हें वहां से जाने के लिए कहा। जब बारबोरा ने समूह के साथ किए जा रहे व्यवहार पर आपत्ति जताई, तो कर्मचारी ने कथित तौर पर उनसे बहस की और हाथापाई की चुनौती दी।
हस्ताक्षर करने वालों ने कहा कि नागालैंड हाउस के मैनेजर ने स्थिति को शांत करने के बजाय कर्मचारी के व्यवहार का बचाव किया। किकॉन द्वारा बार-बार यह बताने के बावजूद कि वह नागा स्कॉलर्स एसोसिएशन द्वारा आमंत्रित रिसोर्स पर्सन हैं, उन्हें भी कथित तौर पर वहां से जाने के लिए कहा गया।
बयान के अनुसार, इस जमावड़े को "परेशानी" और "व्यवधान" करार दिया गया।
हस्ताक्षर करने वालों ने किकॉन और बारबोरा के अपमान और डराने-धमकाने की घटना की निंदा की और कहा कि इस घटना पर नागालैंड सरकार को ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में नागालैंड सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले एक सार्वजनिक संस्थान के तौर पर नागालैंड हाउस की यह ज़िम्मेदारी है कि वह छात्रों, विद्वानों, आमंत्रित अतिथियों और आम जनता के साथ सम्मान और शिष्टाचार से पेश आए।
बयान में पूर्वोत्तर में जातीय और भाषाई पहचान को लेकर पूर्वाग्रह और शत्रुता पर भी चिंता जताई गई। इसमें कहा गया कि इस क्षेत्र के राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले सार्वजनिक संस्थानों को व्यक्ति की जातीयता, भाषा या मूल स्थान की परवाह किए बिना सम्मान और समान व्यवहार सुनिश्चित करना चाहिए।
हस्ताक्षर करने वालों ने नागा स्कॉलर्स एसोसिएशन, नागा स्टूडेंट्स यूनियन दिल्ली और उन नागा छात्रों व विद्वानों के प्रति एकजुटता व्यक्त की, जो घटना के दौरान और उसके बाद किकॉन और बारबोरा के साथ खड़े रहे। उन्होंने नागालैंड सरकार से इस घटना का तुरंत संज्ञान लेने, एक पारदर्शी जांच शुरू करने और जांच के नतीजों के आधार पर उचित कार्रवाई करने की मांग की।
समूह ने नागालैंड हाउस में जनता के संपर्क में रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि उन्हें मेहमानों, छात्रों और आम लोगों के साथ पेशेवर तरीके से, विनम्रता और सम्मान के साथ पेश आना चाहिए।
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