नागालैंड

FCRA में प्रस्तावित संशोधनों पर नागालैंड विधानसभा ने जताई चिंता

nidhi
2 Sept 2026 2:18 PM IST
FCRA में प्रस्तावित संशोधनों पर नागालैंड विधानसभा ने जताई चिंता
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FCRA संशोधन को लेकर उठे सवाल

कोहिमा: नागालैंड विधानसभा में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चिंता जताई गई है। विधानसभा के सदस्यों ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों का राज्य में काम करने वाले चर्च, धार्मिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक सेवा से जुड़ी संस्थाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। सदस्यों ने केंद्र सरकार से संशोधन को लागू करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग की।

विधानसभा में उठाया गया मुद्दा
विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायकों ने FCRA के तहत पंजीकरण और उसके नवीनीकरण से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों का मुद्दा उठाया। खासतौर पर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन समाप्त होने या रद्द किए जाने की स्थिति में उसकी संपत्तियों और विदेशी योगदान से अर्जित परिसंपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित बदलावों पर चिंता जाहिर की गई। सदस्यों का कहना था कि ऐसे प्रावधानों के व्यावहारिक प्रभाव को समझने की जरूरत है।
नागालैंड में चर्च और विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। इसी वजह से विधायकों ने आशंका जताई कि नियमों में बदलाव का असर केवल धार्मिक संस्थाओं तक सीमित न रहकर उनके द्वारा संचालित सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने क्या कहा?
चर्चा में मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने भी इस विषय पर व्यापक परामर्श की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले से जुड़ी चिंताओं को केंद्र सरकार के समक्ष उठाती रहेगी। विधानसभा में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी नए प्रावधान के संभावित परिणामों पर सभी हितधारकों की राय ली जानी चाहिए।
विधायकों ने यह भी कहा कि नागालैंड की सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियां देश के कई दूसरे राज्यों से अलग हैं। ऐसे में कानून में बदलाव करते समय राज्य की विशेष परिस्थितियों और यहां काम करने वाले संगठनों की भूमिका को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
क्या है FCRA?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में व्यक्तियों, संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा विदेशों से मिलने वाले योगदान को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके तहत विदेशी फंड प्राप्त करने वाली पात्र संस्थाओं को पंजीकरण या निर्धारित अनुमति की जरूरत होती है। इसका उद्देश्य विदेशी योगदान की प्राप्ति और उसके इस्तेमाल को कानून के दायरे में नियंत्रित करना है।
समय-समय पर केंद्र सरकार ने FCRA के नियमों में बदलाव किए हैं और विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए अनुपालन संबंधी प्रावधान निर्धारित किए हैं। प्रस्तावित नए बदलावों को लेकर नागालैंड में इसलिए ज्यादा चर्चा हो रही है क्योंकि राज्य में बड़ी संख्या में धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं विभिन्न जनकल्याण गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं।
केंद्र के सामने रखी जाएंगी चिंताएं
विधानसभा की चर्चा का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि FCRA में किसी भी बदलाव से पहले उसके जमीनी प्रभाव का आकलन किया जाए। नागालैंड सरकार ने संकेत दिया है कि राज्य की चिंताओं को केंद्र के सामने रखा जाएगा।
अब निगाहें केंद्र सरकार की आगे की प्रक्रिया पर हैं। नागालैंड के विधायकों की मांग है कि प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम फैसला लेने से पहले राज्यों, चर्च संगठनों और अन्य प्रभावित संस्थाओं के साथ पर्याप्त संवाद किया जाए, ताकि विदेशी योगदान की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ सामाजिक और जनकल्याण गतिविधियों पर अनावश्यक असर न पड़े।
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