नागालैंड
DGP का बड़ा कदम: शराब तस्करी के खातमे के लिए बनेगी उच्च-स्तरीय SIT
Tara Tandi
1 Oct 2026 7:16 PM IST

x
दीमापुर: नागालैंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) रूपिन शर्मा ने कहा कि मोकोकचुंग और तुएनसांग में नकली शराब से संदिग्ध मौतों की खबरों के बाद, पुलिस विभाग राज्य भर में शराब की तस्करी की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) बनाने पर विचार करेगा।
मीडिया से बात करते हुए, शर्मा ने कहा कि मोकोकचुंग और तुएनसांग में अलग-अलग SIT बनाई गई हैं, जबकि पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्तर पर अभी तक कोई अलग टीम नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कोहिमा में शराब की लगभग 7,700 बोतलें जब्त होने के बाद यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है। शर्मा ने कहा कि मोकोकचुंग, तुएनसांग और कोहिमा के तीनों मामलों की एक साथ जांच की जा सकती है ताकि यह तय किया जा सके कि शराब की तस्करी की विभिन्न पहलुओं से जांच के लिए उच्च-स्तरीय जांच की आवश्यकता है या नहीं। शर्मा ने कहा, "अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन हम इस पर विचार करेंगे।"
इस आलोचना पर कि नागालैंड में SIT अक्सर नतीजे देने में विफल रही हैं, शर्मा ने कहा कि राज्य का आपराधिक जांच विभाग (CID) तुलनात्मक रूप से छोटा है और इसमें अन्य राज्यों की क्राइम ब्रांच-CID इकाइयों की तरह संसाधन और जांचकर्ता उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि नागालैंड ने पारंपरिक रूप से विभिन्न पुलिस इकाइयों से अधिकारियों को लेकर SIT का गठन किया है। हालांकि, ऐसे अधिकारी SIT की जिम्मेदारियों को संभालते हुए भी अपनी नियमित ड्यूटी करते रहते थे, जिससे ऐसी स्थिति पैदा हो जाती थी कि वे "दो नावों पर सवार" होते थे। शर्मा ने कहा कि पुलिस CID को मजबूत करने के लिए काम कर रही है ताकि अधिक केंद्रित जांच की जा सके।
पुलिस और आबकारी विभाग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत: नागालैंड शराब पूर्ण निषेध (NLTP) अधिनियम को लागू करने पर, DGP ने कहा कि पुलिस और आबकारी विभाग के बीच कोई विवाद नहीं है और दोनों एजेंसियों के बीच मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया।
हालांकि, उन्होंने बेहतर तालमेल की गुंजाइश को स्वीकार किया, खासकर बॉन्डेड वेयरहाउस और शराब से संबंधित प्रवर्तन के संबंध में।
शर्मा ने कहा कि पुलिस बॉन्डेड वेयरहाउस लाइसेंस जारी करने में शामिल नहीं थी और उन्हें ऐसे लाइसेंस के विवरण के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि विभाग इस मामले को देखेगा।
ADGP संदीप एम. तमगाडगे ने बताया कि NLTP अधिनियम के तहत, कार्यान्वयन के लिए सक्षम प्राधिकारी निषेध निदेशक (Director of Prohibition) हैं, जो आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) भी हैं। हालांकि, पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अधिकारियों (OCs) को प्रोहिबिशन ऑफिसर (निषेध अधिकारी) की शक्तियां दी गई थीं।
उन्होंने कहा कि पुलिस गाड़ियों और जगहों की तलाशी ले सकती है, सामान ज़ब्त कर सकती है और लोगों को हिरासत में ले सकती है, लेकिन गिरफ़्तारी सिर्फ़ FIR दर्ज होने के बाद ही की जा सकती है।
तमगाडगे ने कहा कि पुलिस NLTP एक्ट के तहत खुद से (suo motu) FIR दर्ज नहीं कर सकती। तुएनसांग और मोकोकचुंग में दर्ज की गई खुद से (suo motu) FIR मौत के मामलों से जुड़ी थीं और उन्हें NLTP एक्ट के तहत दर्ज नहीं किया गया था।
उन्होंने कहा कि अगर पुलिस को किसी इमारत या गाड़ी में शराब रखी हुई मिलती है, तो FIR सिर्फ़ एक्साइज़ अधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर ही दर्ज की जा सकती है। उन्होंने इसे एक कानूनी मुद्दा बताया और कहा कि सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया गया है।
मौत का शक, फोरेंसिक सबूत का इंतज़ार: नकली शराब से जुड़ी मौतों के बारे में तमगाडगे ने कहा कि पुलिस ने तुएनसांग और मोकोकचुंग में दो मामले खुद से (suo motu) दर्ज किए हैं।
उन्होंने कहा कि तुएनसांग में मरने वालों में से किसी का भी पोस्टमार्टम नहीं हुआ, जबकि मोकोकचुंग में चार लोगों का पोस्टमार्टम किया गया।
तमगाडगे ने ज़ोर देकर कहा कि इस स्टेज पर मौतों का नकली शराब से जुड़ा होना सिर्फ़ शक है और मौत की वजह पक्का करने के लिए वैज्ञानिक सबूतों की ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि ज़ब्त की गई शराब के सैंपल CFSL दीमापुर और CFSL गुवाहाटी भेजे गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब नकली थी या नहीं।
तमगाडगे के मुताबिक, जांच करने वालों ने नागालैंड के बाहर उन जगहों की पहचान कर ली है जहाँ से कथित तौर पर शराब खरीदी गई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए जांच को आगे बढ़ाने के लिए पक्के सबूतों की ज़रूरत है।
पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस आधुनिकीकरण पर शर्मा ने कहा कि नागालैंड पुलिस के पास अभी पर्याप्त हथियार और गोला-बारूद हैं, जबकि और सामान खरीदना ऑपरेशन की ज़रूरतों पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा कि विभाग ने कई तरह के उपकरण खरीदे हैं, जिनमें मेटल डिटेक्टर, डोर-फ़्रेम मेटल डिटेक्टर, डीप-सर्च मेटल डिटेक्टर, फोरेंसिक उपकरण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDRs) का विश्लेषण करने वाले सिस्टम और मोबाइल फ़ोन व चोरी हुए मोबाइल फ़ोन से डेटा निकालने वाले टूल शामिल हैं।
शर्मा ने कहा कि नागालैंड पुलिस में जांच का काम एक नया विषय है और राज्य धीरे-धीरे अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है। फ़ोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के बारे में शर्मा ने कहा कि फ़ोरेंसिक क्षमताओं को बेहतर बनाने की योजनाएँ थीं। उन्होंने कहा कि नागालैंड में लगभग 1,300 FIR दर्ज की गई थीं और हाई-एंड उपकरण खरीदने का काम व्यावहारिक ज़रूरतों पर आधारित होना चाहिए।
तमगड्गे ने कहा कि भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित पुलिस आधुनिकीकरण योजना में मोबिलिटी, हथियार और गोला-बारूद तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे योग्य घटक शामिल थे, जबकि नेम प्लेट और यूनिफ़ॉर्म एक्सेसरीज़ जैसी व्यक्तिगत चीज़ें इसमें शामिल नहीं थीं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने इस साल फ़ोरेंसिक का एक अलग निदेशालय बनाने के लिए एक अधिसूचना जारी की थी।
Next Story





