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नागालैंड यूनिवर्सिटी की बड़ी उपलब्धि
कोहिमा: नागालैंड यूनिवर्सिटी ने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के चार फैकल्टी सदस्यों को दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। इस उपलब्धि ने विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों और वैज्ञानिक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में किसी विश्वविद्यालय के शिक्षकों का शामिल होना उसके शोध कार्यों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशन, उनके कार्यों को मिलने वाले संदर्भ और अन्य शोध-संबंधी संकेतकों के आधार पर ऐसी सूचियां तैयार की जाती हैं।
विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा तैयार नवीनतम सूची में उसके चार प्रोफेसरों को स्थान मिला है। इनमें तीन वैज्ञानिकों को उनके पूरे वैज्ञानिक करियर के दौरान किए गए शोध कार्यों के आधार पर करियर-लॉन्ग श्रेणी में भी शामिल किया गया है। इस सूची में कृषि इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर प्रभाकर शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अंबरीश सिंह, वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर जोगिंदर सिंह और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर प्रणव कुमार प्रभाकर शामिल हैं।
प्रोफेसर अंबरीश सिंह, जोगिंदर सिंह और प्रणव कुमार प्रभाकर को करियर-लॉन्ग टॉप 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की श्रेणी में भी स्थान मिला है। यह श्रेणी वैज्ञानिकों के लंबे समय तक किए गए शोध कार्यों और उनके प्रभाव को मान्यता देती है। प्रोफेसर प्रभाकर शर्मा जल विज्ञान और पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनुसंधान करते हैं। उनके शोध में भूजल प्रबंधन, माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण, जलभृतों का अध्ययन और पर्यावरण से प्रदूषक तत्वों को हटाने की तकनीकें शामिल हैं। उन्होंने 119 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और उनके नाम पांच पेटेंट हैं।
प्रोफेसर अंबरीश सिंह इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री, पदार्थ विज्ञान, संक्षारण नियंत्रण और पॉलिमर के क्षेत्र में काम करते हैं। उनके शोध कार्यों को 10 हजार से अधिक बार उद्धृत किया गया है। वह ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के फेलो भी हैं। प्रोफेसर जोगिंदर सिंह का शोध सूक्ष्मजीव विज्ञान, पादप विज्ञान और पर्यावरण अनुसंधान पर केंद्रित है। उन्होंने 120 से अधिक शोध और समीक्षा लेख प्रकाशित किए हैं। इसके अलावा उन्होंने 15 पुस्तकों का संपादन किया है और लगभग 60 पुस्तक अध्यायों में योगदान दिया है।
प्रोफेसर प्रणव कुमार प्रभाकर जैव प्रौद्योगिकी और जैव चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े हैं। उनका शोध मधुमेह, चयापचय संबंधी विकारों और इंसुलिन को मौखिक रूप से देने की संभावित तकनीकों पर केंद्रित है। उन्हें लगातार छठे वर्ष इस वैश्विक सूची में स्थान मिला है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जगदीश के. पटनायक ने चारों वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। यह शिक्षकों की मेहनत, शैक्षणिक उत्कृष्टता और वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कुलपति ने उम्मीद जताई कि इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता से विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों और शोधार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान करने की प्रेरणा मिलेगी।
विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची तैयार करने में स्कोपस डेटाबेस के शोध आंकड़ों का उपयोग किया जाता है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध पत्रों को मिले उद्धरण, एच-इंडेक्स और अन्य शोध प्रभाव संकेतकों का मूल्यांकन किया जाता है। इस डेटाबेस में 22 प्रमुख वैज्ञानिक क्षेत्रों और 174 उपक्षेत्रों को शामिल किया गया है। नागालैंड यूनिवर्सिटी के चार वैज्ञानिकों को मिली यह पहचान विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पूर्वोत्तर भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधान की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति भी सामने आई है।
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