
x
वैज्ञानिकों का नया शोध
नागालैंड: भारत के वैज्ञानिकों ने क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किया है। नागालैंड यूनिवर्सिटी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक नई द्विआयामी क्वांटम लैटिस संरचना का प्रस्ताव दिया है। इसकी मदद से चुंबकीय क्षेत्र का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनों की क्वांटम अवस्थाओं को नियंत्रित किया जा सकता है। यह शोध भविष्य में क्वांटम सेंसर, प्रोग्रामेबल क्वांटम उपकरणों और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के विकास में उपयोगी साबित हो सकता है।
इस नई संरचना को डायमंड-डोडेकागन लैटिस (Diamond-Dodecagon Lattice) नाम दिया गया है। कंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से वैज्ञानिकों ने पाया कि इस संरचना में इलेक्ट्रॉनों की गति को सीमित किया जा सकता है। इससे कुछ विशेष क्वांटम अवस्थाएं बनती हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में फ्लैट बैंड कहा जाता है।
दो भारतीय वैज्ञानिकों ने मिलकर किया शोध
इस अध्ययन को नागालैंड यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. बिप्लब पाल और आईआईटी बॉम्बे के पूर्व पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता डॉ. जॉयदीप माझी ने संयुक्त रूप से पूरा किया है। शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका Journal of Physics: Condensed Matter में प्रकाशित हुए हैं। यह पत्रिका भौतिकी, क्वांटम पदार्थों और इलेक्ट्रॉनिक गुणों से संबंधित शोध प्रकाशित करती है।
क्या है डायमंड-डोडेकागन लैटिस?
डायमंड-डोडेकागन लैटिस एक प्रस्तावित ज्यामितीय संरचना है, जिसमें परमाणुओं या उनके समकक्ष क्वांटम स्थलों को विशेष तरीके से व्यवस्थित किया जाता है। सामान्य पदार्थों में इलेक्ट्रॉन एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति कर सकते हैं। यही गति विद्युत प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया कि विशेष ज्यामितीय संरचना में इलेक्ट्रॉनों के लिए उपलब्ध अलग-अलग रास्तों के क्वांटम प्रभाव एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर सकते हैं। इसके कारण इलेक्ट्रॉन सीमित क्षेत्र में रह जाते हैं। इसे कॉम्पैक्ट लोकलाइज्ड स्टेट कहा जाता है। नई प्रस्तावित संरचना में वैज्ञानिकों ने ऐसे तीन फ्लैट एनर्जी बैंड की पहचान की है।
चुंबकीय क्षेत्र से बदली जा सकेगी क्वांटम अवस्था
शोध की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस संरचना में बाहरी चुंबकीय प्रभाव के जरिए इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार को बदला जा सकता है। वैज्ञानिकों के कंप्यूटर सिमुलेशन के अनुसार, चुंबकीय फ्लक्स में बदलाव करने से फ्लैट बैंड की विशेषताएं बदल सकती हैं। इसके साथ संरचना में टोपोलॉजिकल फेज ट्रांजिशन भी उत्पन्न किया जा सकता है। इस अवस्था में पदार्थ का अंदरूनी हिस्सा विद्युत का कुचालक हो सकता है, जबकि किनारों पर विद्युत प्रवाह संभव हो सकता है। ऐसी विशेषताएं भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक परिवहन और क्वांटम उपकरणों पर शोध के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
क्वांटम सेंसर और कंप्यूटिंग में मिल सकती है मदद
क्वांटम सेंसर अत्यंत छोटे भौतिक परिवर्तनों का पता लगाने के लिए क्वांटम गुणों का इस्तेमाल करते हैं। वहीं प्रोग्रामेबल क्वांटम उपकरणों में क्वांटम अवस्थाओं पर सटीक नियंत्रण की आवश्यकता होती है। नई लैटिस संरचना इलेक्ट्रॉनों की गति और चुंबकीय प्रभाव को नियंत्रित करने का एक संभावित तरीका प्रस्तुत करती है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन अभी सैद्धांतिक और कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित है। इससे कोई तैयार व्यावसायिक उपकरण विकसित नहीं हुआ है।
नागालैंड यूनिवर्सिटी के कुलपति ने दी बधाई
नागालैंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार पटनायक ने दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों की उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्वांटम पदार्थों और उभरती क्वांटम तकनीकों में इस तरह का सहयोगात्मक अनुसंधान भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत कर सकता है। उन्होंने शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए भविष्य में भी विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
अब प्रयोगशाला में होगी अगली चुनौती
शोधकर्ताओं के सामने अगला महत्वपूर्ण कदम इस प्रस्तावित संरचना को वास्तविक प्रयोगात्मक प्रणाली में तैयार करना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि फोटोनिक लैटिस और अत्यंत कम तापमान वाली परमाणु प्रणालियों के माध्यम से इस मॉडल के अनुमानित व्यवहार का परीक्षण किया जा सकता है।
Next Story





