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दीमापुर: नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (NBCC) ने 'नागालैंड शराब पूर्ण निषेध अधिनियम, 1989' (NLTP एक्ट) के मकसद और भावना के प्रति अपना समर्थन फिर से जताया है। काउंसिल का तर्क है कि अवैध शराब के कारोबार की मौजूदगी, शराब के गलत इस्तेमाल से परिवारों और समुदायों को बचाने के लिए बनाए गए कानून को रद्द करने का सही कारण नहीं हो सकती।
एक प्रेस विज्ञप्ति में, NBCC के महासचिव रेवरेंड डॉ. मार पोंगनेर और सामाजिक मामलों के सचिव डॉ. विलो नालेओ ने कहा कि शराब पर रोक लगाने का फैसला परिवारों, समुदायों और समाज पर शराब के असर को लेकर जताई गई चिंताओं पर आधारित था, न कि सिर्फ़ नियमन या सरकारी राजस्व का मामला था।
काउंसिल ने कहा कि इस मुद्दे को मानवीय गरिमा, परिवार कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक जिम्मेदारी और कमजोर लोगों की सुरक्षा के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।
काउंसिल ने माना कि अवैध शराब का बाज़ार एक गंभीर चुनौती है; लगातार ज़ब्ती की कार्रवाई, नकली शराब को लेकर चिंताएं और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आ रही मुश्किलें इसके लागू होने में कमियों को दिखाती हैं।
हालांकि, NBCC ने कहा कि नियमों के उल्लंघन का मतलब यह नहीं है कि शराब पर रोक लगाने का मूल सिद्धांत ही गलत है। काउंसिल ने कहा कि ज़्यादा ज़रूरी सवाल ये हैं कि शराब की ज़्यादा उपलब्धता से क्या सामाजिक नुकसान हो सकते हैं, शराब पर रोक परिवारों और कमजोर लोगों को क्या सुरक्षा देती है, कानून को असरदार बनाने में नागरिकों और संस्थाओं की क्या ज़िम्मेदारी है, और जहां इसे लागू करने में दिक्कतें आ रही हैं, वहां क्या सुधार किए जाने चाहिए।
काउंसिल ने कहा कि इन सवालों के जवाब के लिए सबूत, सार्वजनिक बातचीत और ज़िम्मेदार शासन की ज़रूरत है, न कि यह मान लेने की कि कानून लागू करने में आ रही मुश्किलों का एकमात्र समाधान इसे रद्द करना है।
NBCC ने शराब की लत की सच्चाई और इससे जूझ रहे लोगों और परिवारों की तकलीफ़ को भी स्वीकार किया।
काउंसिल ने कहा कि चर्च ने जागरूकता, काउंसलिंग, पुनर्वास, प्रार्थना, पादरी की देखरेख और सामुदायिक हस्तक्षेप के ज़रिए इस समस्या को हल करने की कोशिश की है।
काउंसिल ने ज़ोर देकर कहा कि उसका मकसद शराब की लत से जूझ रहे लोगों को बुरा-भला कहना नहीं, बल्कि उनके सुधार और गरिमा में मदद करना है।
काउंसिल ने कहा कि चर्च की आज़ादी की समझ में लत, शोषण और रिश्तों के टूटने से आज़ादी भी शामिल है, साथ ही संयम, आत्म-नियंत्रण और ज़िम्मेदारी जैसे मूल्यों को भी माना जाता है।
अवैध शराब के कारोबार पर NBCC ने कहा कि ब्लैक मार्केट को कानून छोड़ने का तर्क नहीं बनाया जाना चाहिए। इसमें अवैध शराब से फ़ायदा उठाने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की गई, साथ ही संगठित गिरोहों, भ्रष्टाचार या अवैध वित्तीय व्यवस्थाओं के बारे में बिना सबूत के लगाए गए आरोपों से सावधान रहने को कहा गया।
काउंसिल ने कहा, "भ्रष्टाचार का सही जवाब भ्रष्टाचार को कानूनी बनाना नहीं है।" उन्होंने कहा कि आपराधिक नेटवर्क से निपटने के लिए असरदार कार्रवाई, संस्थागत जवाबदेही, समुदाय का सहयोग और ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई करने वाले सिस्टम में सुधार की ज़रूरत है।
NBCC ने कहा कि शराबबंदी को लागू करने का काम सिर्फ़ एक विभाग पर नहीं छोड़ा जा सकता; इसके लिए सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियों, धार्मिक संस्थाओं, गाँव और समुदाय के संगठनों, महिलाओं, युवाओं और छात्र संगठनों, परिवारों, मेडिकल और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सिविल सोसाइटी और नागरिकों के बीच सहयोग की ज़रूरत है।
ट्वेनसांग और मोकोकचुंग में हाल ही में हुई मौतों का ज़िक्र करते हुए काउंसिल ने कहा कि आबकारी और पुलिस विभागों ने अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए कोशिशें तेज़ कर दी हैं। उन्होंने सख़्ती से लागू करने की दिशा में छात्र संगठनों, डिप्टी कमिश्नरों और पुलिस अधिकारियों की पहल की तारीफ़ की।
उन्होंने ज़ुनहेबोटो में ज़ब्त की गई शराब को नष्ट करने का भी उदाहरण दिया, जिसके साथ ही सिविल सोसाइटी, समुदाय के नेताओं और आम जनता को शामिल करते हुए सामूहिक प्रयास की आधिकारिक अपील की गई थी; इसे उन्होंने मौजूदा हालात में ज़रूरी 'साझा ज़िम्मेदारी' का उदाहरण बताया।
NBCC ने कहा, "कानून को सिर्फ़ बनाने की नहीं, बल्कि लागू करने की ज़रूरत होती है।" साथ ही उन्होंने माना कि NLTP एक्ट पूरी तरह सही नहीं था और इसे लागू करने के सभी पहलू सफल नहीं रहे।
काउंसिल ने कहा कि कानूनों की समीक्षा उनके सामाजिक असर को ध्यान में रखते हुए लगातार की जानी चाहिए, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि समीक्षा का मतलब अपने-आप कानून को रद्द करना नहीं होना चाहिए।
उन्होंने समाज की सुरक्षा करने वाले प्रावधानों को मज़बूत करने, कमियों को दूर करने, भ्रष्टाचार से निपटने, कार्रवाई को बेहतर बनाने, पुनर्वास का दायरा बढ़ाने और यह पक्का करने की मांग की कि कानून अपने मकसद (जनहित) को पूरा करे।
NBCC ने कहा कि सरकार जब NLTP के मुद्दे पर विचार करे, तो उसके साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य, शराब से होने वाले नुकसान, अवैध बाज़ार, कार्रवाई के नतीजों, परिवार कल्याण और प्रभावित समुदायों के अनुभवों पर पारदर्शी बातचीत और भरोसेमंद सबूत भी होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि किसी कानून को लागू करना मुश्किल है, चर्च अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता; लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऐसी ज़िम्मेदारी के लिए सच्चाई की ईमानदारी से समीक्षा भी ज़रूरी है।
काउंसिल ने "सच्चाई पर आधारित आकलन, ज़िम्मेदारी से कार्रवाई, संस्थागत ईमानदारी, सहानुभूतिपूर्ण पुनर्वास और सबूतों पर आधारित सार्वजनिक नीति" की मांग की।
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