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केंद्रीय टीम ने अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट
मोन: नागालैंड में वर्ष 2026 के मानसून के दौरान हुई भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की एक विशेष टीम ने मोन जिले का दौरा किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से जुड़ी आठ सदस्यीय टीम मंगलवार, 6 अक्टूबर को जिले में पहुंची। इस दौरान अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मानसून से हुए नुकसान की जानकारी ली। टीम का मुख्य उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में क्षति का सही आकलन करना और आपदा के बाद आवश्यक पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण की जरूरतों का पता लगाना था।
केंद्रीय टीम का यह दौरा नागालैंड में चल रहे पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) अभियान का हिस्सा है। इसके तहत मानसून से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में सरकारी बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य क्षेत्रों को हुए नुकसान का आकलन कर आगे की जरूरतों का निर्धारण किया जाता है। मोन जिले के उपायुक्त कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित बैठक में उपायुक्त वेन्येई कोन्याक ने केंद्रीय टीम का स्वागत किया। उन्होंने जिले में मानसून 2026 के दौरान हुई क्षति के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हुए नुकसान का विवरण प्रस्तुत किया।
विभागीय अधिकारियों ने मानसून से संबंधित क्षति की रिपोर्ट केंद्रीय टीम को सौंपी। केंद्रीय दल ने इन रिपोर्टों का अध्ययन करते हुए नुकसान के आकलन की प्रक्रिया पर चर्चा की। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक विभाग वास्तविक नुकसान का पूरा विवरण दर्ज करे, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण क्षति की जानकारी छूटने न पाए। केंद्रीय टीम में रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) के वैज्ञानिक मिकी मेकॉन दलबेहरा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के सहायक प्रोफेसर रोहित कुमार और डॉ. गगनदीप सिंह शामिल थे। इसके अलावा बुनियादी ढांचा क्षेत्र के वरिष्ठ सलाहकार इंद्रनील बोस, एनडीएमए के प्रमुख सलाहकार शशांक मिश्रा, उत्पादक क्षेत्र के वरिष्ठ सलाहकार सीपी मोहन और वरिष्ठ सलाहकार चांदनी पीसी सेनन भी टीम का हिस्सा रहे।
नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के राहत, पुनर्वास और आपदा न्यूनीकरण से जुड़े सहायक प्रबंधक एल. जोनहिबेमो ओड्युओ भी केंद्रीय दल के साथ मौजूद रहे। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की मौजूदगी का उद्देश्य नुकसान का व्यापक और तकनीकी आधार पर मूल्यांकन करना है। नागालैंड पहाड़ी राज्य होने के कारण मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रहता है। भारी बारिश से भूस्खलन, सड़कों को नुकसान और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
आपदा के बाद नुकसान का आकलन केवल क्षतिग्रस्त संपत्तियों की सूची तैयार करने तक सीमित नहीं रहता। इसमें भविष्य में पुनर्निर्माण, जरूरी सेवाओं की बहाली और आपदा से बचाव की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता भी देखी जाती है। केंद्रीय टीम ने विभागीय अधिकारियों को विशेष रूप से वास्तविक नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आए और पुनर्वास से जुड़ी प्राथमिकताओं का निर्धारण किया जा सके।
मोन जिले में हुए नुकसान का अंतिम वित्तीय आकलन और संभावित सहायता राशि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। केंद्रीय टीम की समीक्षा से मिलने वाली जानकारी आगे की पुनर्वास और पुनर्निर्माण योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। फिलहाल केंद्रीय और जिला प्रशासन के बीच समन्वय बनाकर मानसून से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों और आवश्यक पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
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