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दीमापुर-कोहिमा रेल लाइन की लागत आठ गुना क्यों बढ़ी?
दीमापुर : नागालैंड की बहुप्रतीक्षित दीमापुर-कोहिमा ब्रॉडगेज रेल परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। इस परियोजना की लागत, जो शुरुआत में अपेक्षाकृत कम आंकी गई थी, अब लगभग आठ गुना तक बढ़ चुकी है। लागत में इस भारी वृद्धि ने परियोजना के क्रियान्वयन, योजना और निर्माण प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा परियोजना में लागत बढ़ने के पीछे केवल एक कारण नहीं होता, बल्कि कई तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक कारक मिलकर इसकी वजह बनते हैं।
शुरुआती अनुमान और वर्तमान लागत
जब इस रेल परियोजना को मंजूरी मिली थी, तब इसकी अनुमानित लागत काफी कम थी। लेकिन वर्षों तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाने, परियोजना के दायरे में बदलाव और महंगाई के कारण लागत लगातार बढ़ती गई। अब संशोधित लागत शुरुआती अनुमान की तुलना में लगभग आठ गुना तक पहुंच गई है।
लागत बढ़ने के प्रमुख कारण
1. भूमि अधिग्रहण में देरी
रेल लाइन के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता होती है। कई स्थानों पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय तक चली, जिससे परियोजना की समयसीमा प्रभावित हुई और लागत बढ़ी।
2. दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां
नागालैंड का पहाड़ी भूभाग रेलवे निर्माण के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पहाड़ों को काटना, गहरी घाटियों पर पुल बनाना और सुरंगों का निर्माण सामान्य मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक महंगा होता है।
3. सुरंगों और पुलों का निर्माण
इस परियोजना में अनेक सुरंगें और बड़े पुल बनाए जा रहे हैं। ऐसे इंजीनियरिंग कार्यों में विशेष तकनीक, मशीनरी और अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है, जिससे लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
4. निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें
इस्पात, सीमेंट, डीजल, मशीनरी और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों में वर्षों के दौरान लगातार वृद्धि हुई। महंगाई का सीधा असर परियोजना की कुल लागत पर पड़ा।
5. श्रम लागत में वृद्धि
लंबे समय तक चलने वाली परियोजनाओं में मजदूरी और मानव संसाधन पर होने वाला खर्च भी बढ़ता है। निर्माण अवधि बढ़ने के कारण श्रम लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
6. समयसीमा का बार-बार बढ़ना
किसी भी परियोजना में देरी होने पर केवल निर्माण लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि प्रशासनिक खर्च, उपकरणों का रखरखाव और अनुबंधों की लागत भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि परियोजना का कुल बजट लगातार बढ़ता गया।
7. डिजाइन और तकनीकी बदलाव
निर्माण के दौरान कई बार सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और डिजाइन में संशोधन करने पड़ते हैं। इन बदलावों से भी अतिरिक्त खर्च जुड़ जाता है।
परियोजना का महत्व
दीमापुर-कोहिमा रेल लाइन नागालैंड की सबसे महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। इसके पूरा होने के बाद—
राज्य की राजधानी क्षेत्र को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।
यात्रियों की आवाजाही आसान होगी।
व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
माल परिवहन तेज और किफायती होगा।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा लाभ
रेल संपर्क बेहतर होने से स्थानीय कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प और अन्य वस्तुओं को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन समय पर निर्माण पूरा करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निगरानी, बेहतर समन्वय और समयबद्ध निर्णयों से लागत में और बढ़ोतरी को रोका जा सकता है।
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