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64 गांवों को मिला संरक्षण का संदेश
दीमापुर: नागालैंड में 'फॉरेस्ट एंड बायोडायवर्सिटी इन द हिमालयाज मैनेजमेंट प्रोजेक्ट' (FBMP) के तहत दो दिवसीय राज्य-स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वनों और जैव विविधता के संरक्षण के लिए समुदाय के नेतृत्व वाली पहलों पर जोर दिया गया। इस दौरान 64 गांवों के प्रतिनिधियों ने संरक्षण से जुड़े अपने अनुभवों और उपलब्धियों को साझा किया।
कोहिमा के कैथेड्रल परिसर में "सामुदायिक संरक्षण: सफलता का जश्न और भविष्य की रूपरेखा" विषय पर आयोजित यह कार्यशाला बुधवार शाम को संपन्न हुई।
कार्यशाला में शामिल गांव के प्रतिनिधियों ने FBMP के सहयोग से की गई गतिविधियों के बारे में अपने अनुभव बताए। इनमें उपकरणों का वितरण, शुरुआती स्तर की गतिविधियां, संस्थागत जुड़ाव और जमीनी स्तर पर अपनाए गए संरक्षण उपाय शामिल थे।
समापन सत्र में विशेष अतिथि के रूप में बोलते हुए, वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव वाई. खिखेटो सेमा ने विभिन्न जिलों से आए सामुदायिक प्रतिनिधियों की भागीदारी और गांव के स्तर पर संरक्षण को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों की सराहना की।
सेमा ने कहा कि इस तरह की बातचीत से जमीनी हकीकत को समझने, व्यावहारिक समाधान खोजने, हितधारकों के बीच तालमेल मजबूत करने और भविष्य की संरक्षण योजनाओं व नीतियों को तैयार करने में मदद मिलती है।
नागालैंड में घटते वन क्षेत्र पर चिंता जताते हुए, उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए वनों और जैव विविधता की रक्षा में समुदाय की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने नागालैंड को प्राप्त विशेष संवैधानिक सुरक्षा उपायों का भी जिक्र किया और प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए इन प्रावधानों का रचनात्मक उपयोग करें।
64 गांवों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, सेमा ने उन्हें जैव विविधता संरक्षण का 'दूत' (एम्बेसडर) बनने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि वे कार्यशाला में सीखी गई बातों को सामुदायिक मंचों के जरिए दूसरों तक पहुंचाएं।
उन्होंने प्रतिभागियों से यह भी अपील की कि कार्यशाला में हुई चर्चाओं और साझा किए गए अनुभवों को वे अपने गांवों में संरक्षण की ठोस पहलों के रूप में लागू करें।
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