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राज्यभर में स्वच्छता, जनकल्याण और स्वयंसेवी गतिविधियों में लोगों ने लिया हिस्सा
Guwahati: मिज़ोरम के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली सामाजिक-सांस्कृतिक और स्वयंसेवी संगठन, 'यंग मिज़ो एसोसिएशन' (YMA) ने सोमवार को पूरे राज्य में सामुदायिक सेवा, सांस्कृतिक और खेल कार्यक्रमों के साथ अपना 91वां स्थापना दिवस मनाया।
इस मौके पर न केवल यादगार कार्यक्रम आयोजित किए गए, बल्कि बड़े पैमाने पर समाज-सेवा के काम भी किए गए। मिज़ोरम भर में YMA की शाखाओं ने सामुदायिक कल्याण पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें सदस्यों ने गांवों, इलाकों और सड़कों पर सफाई अभियान चलाए। कई शाखाओं ने अनाथालयों, पुनर्वास केंद्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत सामग्री और आर्थिक सहायता देकर मदद भी की।
इस अवसर पर बधाई देते हुए, मिज़ोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने समाज में YMA के लंबे समय से चले आ रहे योगदान की सराहना की। उन्होंने संगठन को राज्य का सबसे बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक और स्वयंसेवी निकाय बताया और इसकी शुरुआत से ही सामुदायिक सेवा में इसकी अहम भूमिका को माना।
राज्यपाल ने वंचितों की मदद करने, मिज़ो संस्कृति, परंपराओं और विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने तथा विभिन्न जन-कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने में सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए YMA के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने लोगों से 'तलावमंगाइहना' (Tlawmngaihna) - यानी निस्वार्थ भाव, करुणा और स्वयंसेवा की भावना - जैसे मिज़ो मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया।
सिंह ने नागरिकों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकता को बढ़ावा देने, बुजुर्गों का सम्मान करने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का भी आह्वान किया। नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए, उन्होंने इस समस्या से निपटने और युवा पीढ़ी के भविष्य की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की अपील की।
सेंट्रल यंग मिज़ो एसोसिएशन (CYMA) के अध्यक्ष आर. लालघेता ने भी ऐसी ही चिंताएं व्यक्त कीं और YMA के नेताओं और सदस्यों से सामुदायिक सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने और नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ लड़ाई को तेज करने का आग्रह किया। उन्होंने नशीली दवाओं के तस्करों को परिवारों, समुदायों और राज्य का दुश्मन बताया।
15 जून, 1935 को 'यंग लुशाई एसोसिएशन' (YLA) के रूप में स्थापित इस संगठन का नाम 1947 में बदलकर 'यंग मिज़ो एसोसिएशन' कर दिया गया। इसकी स्थापना वेल्श ईसाई मिशनरियों के प्रोत्साहन से की गई थी, जिन्होंने तेजी से हो रहे सामाजिक और राजनीतिक बदलावों के बीच मिज़ो संस्कृति और पहचान को संरक्षित करने की आवश्यकता को समझा था।
आज, इस संगठन का संचालन आइजोल में स्थित सेंट्रल YMA द्वारा किया जाता है। यह मिज़ोरम और असम, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में फैले आठ सब-हेडक्वार्टर, 50 ग्रुप और 821 ब्रांच के ज़रिए काम करता है।
मिज़ोरम के अंदर और बाहर लगभग पाँच लाख सदस्यों के साथ, YMA समाज को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह संगठन खाली समय का सही इस्तेमाल, सामाजिक विकास, ईसाई मूल्यों, आत्म-अनुशासन, पारिवारिक मूल्यों, ईमानदारी, सहनशीलता, सामाजिक ज़िम्मेदारी, संस्कृति को बचाने, शराब और नशीली चीज़ों से दूर रहने और शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे कामों को प्रोत्साहित करता है।
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