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PAP के नियमों में उलझे विदेशी पर्यटक
आइजोल: मिज़ोरम आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए Protected Area Permit (PAP) की प्रक्रिया बड़ी परेशानी बनती जा रही है। सबसे बड़ी समस्या अलग-अलग सरकारी वेबसाइटों और निर्देशों में विरोधाभासी जानकारी होना है। कुछ आधिकारिक दस्तावेज PAP को अनिवार्य बताते हैं, जबकि मिज़ोरम पर्यटन की वेबसाइट पर अभी भी विदेशी पर्यटकों को PAP से छूट होने की जानकारी दिखाई देती है। इसी भ्रम के कारण कई यात्रियों को जुर्माना, यात्रा रद्द होने और अतिरिक्त खर्च जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्र सरकार ने 17 दिसंबर 2024 को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मिज़ोरम, मणिपुर और नागालैंड को दी गई PAP छूट तत्काल प्रभाव से वापस ले ली थी। इसके बाद इन राज्यों में जाने वाले विदेशी नागरिकों के लिए Protected Area Permit फिर से अनिवार्य हो गया। मिज़ोरम सरकार ने अप्रैल 2025 में कई जिला पुलिस अधीक्षकों और राज्य FRO को PAP जारी करने की शक्ति भी सौंप दी थी।
इसके बावजूद मिज़ोरम पर्यटन की मौजूदा Entry Formalities वेबसाइट पर अब भी लिखा है कि विदेशी नागरिकों को PAP लेने की जरूरत नहीं है और उन्हें केवल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर Foreigners Registration Officer के पास रजिस्ट्रेशन करना होगा। यही विरोधाभास यात्रियों के लिए सबसे बड़ा भ्रम पैदा कर रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में रहने वाले एक OCI कार्डधारक अपने परिवार के साथ मई 2026 में मिज़ोरम आए थे। उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर पता चला कि PAP आवश्यक है। आवेदन की फीस ₹4,000 थी, लेकिन ऑनलाइन भुगतान बार-बार असफल हुआ। करीब तीन सप्ताह बाद भुगतान संभव हुआ, लेकिन इस बीच उन्हें बिना वैध परमिट प्रवेश करने के लिए ₹50,000 के जुर्माने का ईमेल मिला।
एक अन्य विदेशी यात्री ने बताया कि PAP के लिए पहले से आवेदन करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं मिली। उनकी छोटी यात्रा के दौरान परमिट तब स्वीकृत हुआ जब वे भारत से बाहर जाने की तैयारी में थे। उनका सवाल था कि यदि किसी पर्यटक को केवल एक या दो दिन के लिए मिज़ोरम जाना हो तो वह करीब एक सप्ताह तक चलने वाली प्रक्रिया का इंतजार कैसे करेगा।
भारतीय मिशनों की सामान्य PAP गाइडलाइन के मुताबिक भारत में प्रवेश कर चुके विदेशी नागरिक को संबंधित क्षेत्र में जाने से कम से कम 15 दिन पहले e-FRRO पोर्टल पर आवेदन करना चाहिए। दूसरी ओर यात्रियों की शिकायत है कि उन्हें आवेदन से पहले जरूरी दस्तावेजों, प्रारूप और प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं मिलती।
ब्रिटेन के एक पर्यटक और शोधकर्ता गैरेथ डेवी ने इसी अनिश्चितता के कारण मिज़ोरम यात्रा रद्द कर दी। उन्होंने होटल और अन्य बुकिंग पर करीब ₹16,000 का नुकसान होने की बात कही। उनके मुताबिक उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने हैं और आवेदन खारिज होने पर आगे क्या विकल्प रहेगा।
PAP व्यवस्था के पीछे सुरक्षा संबंधी कारण हैं। दिसंबर 2024 के गृह मंत्रालय के सर्कुलर में कहा गया था कि सीमा क्षेत्रों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण मिज़ोरम, मणिपुर और नागालैंड को मिली छूट वापस ली जा रही है। विदेशी नागरिकों को इन राज्यों में प्रवेश के लिए अब अधिकृत अधिकारियों से परमिट लेना आवश्यक है।
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