मिज़ोरम

सड़कों से वर्ल्ड स्टेज तक पहुंचा मिजोरम का स्केटिंग स्टार

nidhi
15 Sept 2026 1:52 PM IST
सड़कों से वर्ल्ड स्टेज तक पहुंचा मिजोरम का स्केटिंग स्टार
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स्केटबोर्डिंग स्टार कीमा की प्रेरक कहानी
आइजोल: आधी रात को खाली सड़कों पर स्केटबोर्डिंग का अभ्यास करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सफर आसान नहीं होता। मिजोरम के युवा स्केटबोर्डर कीमा की कहानी भी इसी जुनून, लगातार अभ्यास और सीमित संसाधनों के बीच आगे बढ़ने की है। स्केटबोर्डिंग जैसे भारत में अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय खेल में अपनी पहचान बनाकर कीमा अब पूर्वोत्तर के उभरते खिलाड़ियों में चर्चा का विषय बन रहे हैं।
कीमा का स्केटबोर्डिंग के प्रति लगाव उन्हें लगातार अभ्यास के लिए प्रेरित करता रहा। स्केटबोर्डिंग के लिए बेहतर जगह और सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियों के बीच उन्होंने उपलब्ध स्थानों पर ही अपनी स्किल बेहतर करने की कोशिश की। रात के समय अपेक्षाकृत खाली जगहों पर अभ्यास करना भी उनकी इसी यात्रा का हिस्सा रहा है।
आधी रात तक चलता था अभ्यास
स्केटबोर्डिंग में संतुलन, गति और तकनीक का तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है। नई ट्रिक सीखने के दौरान बार-बार गिरना और फिर उठकर कोशिश करना इस खेल का हिस्सा है। कीमा ने भी लंबे अभ्यास के जरिए अपनी तकनीक पर काम किया और धीरे-धीरे कठिन ट्रिक्स सीखीं। उनकी कहानी इस वजह से भी खास है क्योंकि पूर्वोत्तर भारत में फुटबॉल, बॉक्सिंग और वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों की मजबूत पहचान के बीच स्केटबोर्डिंग अभी अपेक्षाकृत नया क्षेत्र है। ऐसे में इस खेल को चुनकर आगे बढ़ना अपने आप में चुनौतीपूर्ण रहा।
अब दुनिया के मंच पर पहचान
स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ कीमा का सफर धीरे-धीरे बड़े मंच तक पहुंचा। उनकी प्रतिभा ने स्केटबोर्डिंग समुदाय का ध्यान खींचा और उन्हें अपनी क्षमता को व्यापक स्तर पर दिखाने का मौका मिला। हालांकि उन्होंने किन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और उनका आधिकारिक प्रदर्शन क्या रहा, इसकी पुष्टि संबंधित प्रतियोगिता रिकॉर्ड से करना जरूरी है।
स्केटबोर्डिंग को ओलंपिक खेलों में जगह मिलने के बाद भारत में भी इसके प्रति युवाओं की दिलचस्पी बढ़ी है। देश के अलग-अलग शहरों में स्केट पार्क और स्केटबोर्डिंग समुदाय विकसित हो रहे हैं, लेकिन छोटे शहरों और पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण सुविधाओं की उपलब्धता अभी भी चुनौती हो सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
कीमा की यात्रा बताती है कि किसी नए खेल में आगे बढ़ने के लिए केवल सुविधाएं ही नहीं, लगातार अभ्यास और सही अवसर भी महत्वपूर्ण हैं। उनका सफर मिजोरम के उन युवाओं को प्रेरित कर सकता है जो पारंपरिक खेलों से अलग किसी नई स्पोर्ट्स कैटेगरी में करियर बनाना चाहते हैं।
आधी रात की स्केटिंग से शुरू हुआ कीमा का सफर अब बड़े मंच तक पहुंच चुका है। आगे बेहतर प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं का अनुभव और संस्थागत सहयोग मिलता है तो मिजोरम का यह युवा स्केटबोर्डर भारतीय स्केटबोर्डिंग में अपनी अलग पहचान और मजबूत कर सकता है।
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