
Mizoram मिजोरम: मिज़ोरम इंडिपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन (MISA), जो राज्य में निजी स्कूल संचालकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने मिज़ोरम बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (MBSE) द्वारा क्लास 10 और 12 के परीक्षा परिणाम जारी करने के नए फॉर्मेट पर गहरी नाराजगी जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि यह बदलाव छात्रों की शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा और प्रेरणा पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
MBSE ने इस वर्ष से अपने परिणामों में मेरिट लिस्ट, टॉप-10 रैंकिंग, डिस्टिंक्शन और डिवीजन जैसी जानकारी प्रकाशित करना बंद कर दिया है। बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य रटने की प्रवृत्ति और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा को कम करना है, ताकि शिक्षा प्रणाली को अधिक कौशल-आधारित और गुणवत्ता-केंद्रित बनाया जा सके।
हालांकि, MISA ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे छात्रों के हितों के खिलाफ बताया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के अध्यक्ष लालनुनकुंगा सैलो ने कहा कि नए रिजल्ट फॉर्मेट से छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना कमजोर होगी, जिससे उनकी उपलब्धियों की स्पष्ट पहचान नहीं हो पाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट लिस्ट, विषयवार टॉपर्स, अंकों का विस्तृत विवरण और डिवीजन क्लासिफिकेशन हटाने से न केवल छात्रों का मनोबल प्रभावित होगा, बल्कि राज्य में शैक्षणिक उत्कृष्टता की परंपरा भी कमजोर पड़ेगी।
MISA अध्यक्ष ने कहा, “हेल्दी एकेडमिक कॉम्पिटिशन छात्रों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। इसे सीमित करना लंबे समय में शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।”
एसोसिएशन का मानना है कि पारदर्शी और विस्तृत परिणाम प्रणाली छात्रों को अपने प्रदर्शन का सही आकलन करने में मदद करती है, जिससे वे आगे की पढ़ाई और करियर की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, बोर्ड का तर्क है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक या रैंकिंग नहीं होना चाहिए, बल्कि कौशल विकास और समझ पर आधारित होना चाहिए।
इस मुद्दे पर राज्य में बहस तेज हो गई है और अभिभावकों तथा शिक्षकों के बीच भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे सकारात्मक सुधार मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे प्रतिस्पर्धा को कमजोर करने वाला कदम बता रहे हैं।





