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मिज़ोरम: रिटायर्ड अधिकारी की री-एंगेजमेंट पर विवाद, MZP ने CM पर उठाए सवाल

Kavita2
24 May 2026 5:48 PM IST
मिज़ोरम: रिटायर्ड अधिकारी की री-एंगेजमेंट पर विवाद, MZP ने CM पर उठाए सवाल
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Mizoram मिजोरम: मिज़ोरम में एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी की री-एंगेजमेंट को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। राज्य की प्रभावशाली छात्र संगठन मिज़ो ज़िरलाई पावल (MZP) ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा पर राजनीतिक पक्षपात और “जनता के साथ धोखा” करने का आरोप लगाया है।

यह पूरा विवाद सरकार द्वारा 23 अप्रैल को जारी एक आदेश के बाद शुरू हुआ, जिसमें रिटायर्ड अधिकारी आर. लालरोडिंगी को पुनः नियुक्ति (री-एम्प्लॉयमेंट) की मंजूरी दी गई थी। यह आदेश 1 मई से प्रभावी हुआ, जिसके तहत उन्हें दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

सरकारी आदेश के अनुसार, आर. लालरोडिंगी, जो 30 अप्रैल को कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज तथा जियोलॉजी एंड माइनिंग विभाग में एडिशनल डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त होने वाली थीं, उन्हें दोहरी भूमिका में पुनः नियुक्त किया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) का पद दिया गया है, जिसका रैंक राज्य सचिव के बराबर माना जाता है। इसके साथ ही उन्हें टूरिज्म विभाग का डायरेक्टर भी नियुक्त किया गया है।

इस निर्णय के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। छात्र संगठन MZP ने इस कदम को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और इसे प्रशासनिक पारदर्शिता के खिलाफ बताया है। संगठन का कहना है कि इस तरह की पुनर्नियुक्तियां योग्य युवाओं के अवसरों को प्रभावित करती हैं और प्रशासन में असंतुलन पैदा करती हैं।

MZP के अनुसार, सरकार द्वारा एक ही व्यक्ति को एक साथ दो महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े करता है। संगठन ने आरोप लगाया कि यह निर्णय योग्यता और प्रक्रिया से अधिक व्यक्तिगत पसंद और राजनीतिक समीकरणों पर आधारित लगता है।

छात्र संगठन ने मुख्यमंत्री लालदुहोमा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम जनता के साथ विश्वासघात के समान है और इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासनिक नियुक्तियों में निष्पक्षता की बजाय पक्षपात हावी है।

इस पूरे मामले ने मिज़ोरम की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों में इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति नीति को और अधिक पारदर्शी और स्पष्ट नियमों के तहत लाया जाना चाहिए।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि ऐसे निर्णय प्रशासनिक अनुभव और कार्यक्षमता को देखते हुए लिए जाते हैं, ताकि अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का लाभ राज्य को मिल सके। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इससे युवा अधिकारियों के अवसर सीमित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारों द्वारा रिटायर्ड अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब एक ही व्यक्ति को एक साथ कई जिम्मेदारियां दी जाती हैं, तो यह प्रशासनिक संतुलन और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

मिज़ोरम में यह मुद्दा अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। छात्र संगठन MZP ने संकेत दिया है कि यदि इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो वे आगे आंदोलन या विरोध का रास्ता अपना सकते हैं।

वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि प्रशासन अपने फैसले को सही ठहराने के लिए अनुभव और दक्षता के आधार पर तर्क दे सकता है।

राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, खासकर तब जब विपक्षी और सामाजिक संगठन इस मुद्दे को और आगे उठाएंगे।

कुल मिलाकर, आर. लालरोडिंगी की री-एंगेजमेंट ने मिज़ोरम में प्रशासनिक नियुक्तियों की पारदर्शिता और नीति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर राज्य की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

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