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मिजोरम: गृह मंत्री के. सपडांगा ने 6 नवंबर को बताया कि मिजोरम में अगर कोई सरकारी कर्मचारी राज्य के पटाखों से जुड़े नए नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे 6 महीने तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
आइजोल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए, सपडांगा ने 'मिजोरम रेगुलेशन ऑफ फायरवर्क्स एक्ट, 2026' (मिजोरम आतिशबाजी विनियमन अधिनियम, 2026) के प्रावधानों के बारे में बताया। इस कानून को राज्य विधानसभा ने अगस्त में पारित किया था और सितंबर में इसकी अधिसूचना जारी की गई थी।
इस कानून का उद्देश्य पटाखों और उससे जुड़ी सामग्रियों के इस्तेमाल, उन्हें अपने पास रखने और उनकी बिक्री को विनियमित करना है। साथ ही, इसमें नियमों के उल्लंघन पर सजा और इसे लागू करने की जिम्मेदारियों के बारे में भी बताया गया है।
मंत्री ने कहा कि नए कानून के तहत, संबंधित उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) की पूर्व अनुमति के बिना पटाखे नहीं जलाए जा सकते, उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और न ही उन्हें अपने पास रखा जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि 'एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884' (विस्फोटक अधिनियम, 1884) के तहत, जरूरी लाइसेंस के बिना पटाखों और उनसे जुड़ी सामग्रियों की बिक्री करना प्रतिबंधित है।
सजा के बारे में बताते हुए सपडांगा ने कहा कि जो लोग नए कानून की धारा 3 और 4 का उल्लंघन करते हुए बिना अनुमति के पटाखे इस्तेमाल करते हैं या अपने पास रखते हैं, उन्हें 3 महीने तक की जेल या 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर मामला 12 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़ा है, तो उनके माता-पिता या अभिभावकों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
मंत्री के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले सरकारी कर्मचारियों को और भी कड़ी सजा मिल सकती है—जिसमें 6 महीने तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है।
जो लोग बिना अनुमति के पटाखे या उससे जुड़ी सामग्री बेचकर धारा 5 का उल्लंघन करते हैं, उन पर 'एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884' के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इसमें 2 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
सपडांगा ने आगे बताया कि नए कानून के तहत होने वाले अपराध 'कॉग्निजेबल' (संज्ञेय) और 'बेलेबल' (जमानती) हैं। इसका मतलब है कि पुलिस मजिस्ट्रेट से पूर्व अनुमति लिए बिना ही मामला दर्ज कर सकती है।
मंत्री ने कहा कि इस कानून का मकसद पटाखों से जुड़ी गतिविधियों को विनियमित करना और एक स्पष्ट कानूनी ढांचे के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
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