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मिजोरम: राज्य ने 'सुमन (SUMAN) रोडमैप 2030' लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य माताओं और नवजातों की रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करना है, और यह सुनिश्चित करना है कि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को समय पर, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।
राज्य की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री लालरिनपुई ने 16 अक्टूबर को 'प्रजनन, मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य' (RMNCH) कार्यक्रम की राज्य-स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस रोडमैप को लॉन्च किया।
यह रोडमैप केंद्र सरकार की 'सुरक्षित मातृत्व आश्वासन' (SUMAN) पहल का हिस्सा है। इस पहल को 2019 में गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
लालरिनपुई ने कहा कि यह रोडमैप सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ माताओं और नवजातों की सुरक्षा के प्रति सरकार की नई प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसका लक्ष्य 2030 तक मातृ मृत्यु दर को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना है। साथ ही, इसका उद्देश्य नवजात और बाल मृत्यु दर को और कम करना और रोकी जा सकने वाली मौतों को रोकना है।
उन्होंने जिला अधिकारियों, कार्यक्रम अधिकारियों और स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों से आग्रह किया कि वे मातृ और नवजात स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। उन्होंने रोडमैप के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकारी विभागों, विभिन्न संगठनों और समुदायों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर भी जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या माताओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं, क्या अधिक नवजात जीवित बच पाते हैं, और क्या माताओं तथा नवजातों की रोकी जा सकने वाली मौतों को टाला जा पाता है।
स्वास्थ्य सचिव लालजरमावी ने बताया कि मिजोरम ने मातृ और बाल स्वास्थ्य देखभाल में काफी प्रगति की है। 2025-26 में संस्थागत प्रसव (अस्पताल में होने वाले प्रसव) की दर लगभग 93 प्रतिशत तक पहुंच गई है। गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान 'प्रसव-पूर्व देखभाल' (antenatal care) के लिए पंजीकरण का आंकड़ा लगभग 81 प्रतिशत रहा है।
हालांकि, उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में कुछ कमियों की ओर भी इशारा किया। विशेष रूप से दक्षिणी जिलों - लॉंग्टलाई (Lawngtlai) और लुंगलेई (Lunglei) - में संस्थागत प्रसव की दर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। राज्य के एकमात्र 'आकांक्षी जिले' (aspirational district) मामित (Mamit) को भी अभी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि अभी भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां कुशल प्रसव सहायकों की मदद के बिना घर पर ही प्रसव (home deliveries) हो रहे हैं।
लालजरमावी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समीक्षा बैठक में सामने आए निष्कर्षों को ठोस उपायों में बदला जाए, और राज्य तथा जिला दोनों स्तरों पर समय-समय पर इसकी समीक्षा (follow-up) सुनिश्चित की जाए।
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