
Mizoram मिजोरम: दक्षिण मिजोरम के लुंगलेई जिला जेल में एक बड़े धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ है, जहां जाली अदालती दस्तावेजों के आधार पर 16 दोषियों को गलत तरीके से रिहा कर दिया गया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने चार सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर जांच शुरू कर दी है।
लुंगलेई के पुलिस अधीक्षक (SP) जे. लालमुआनकिमा ने जानकारी दी कि यह मामला हाल ही में तब सामने आया जब पुलिस को इस संबंध में एक औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई। शुरुआती जांच में पाया गया कि कुछ महीनों के दौरान फर्जी अदालती आदेश और नकली मुहरों का इस्तेमाल कर जेल प्रशासन को धोखा दिया गया और कैदियों की रिहाई कराई गई।
उन्होंने बताया कि अब तक रिहा किए गए 16 कैदियों में से 12 को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक कैदी की रिहाई के बाद मौत हो चुकी है। शेष तीन कैदियों की तलाश अभी भी जारी है और पुलिस लगातार तलाशी अभियान चला रही है।
एसपी ने बताया कि जांच में 22 वर्षीय कैदी जेरेमी लालथांगतुरा को इस पूरे फर्जीवाड़े का संदिग्ध मास्टरमाइंड माना जा रहा है। उस पर पहले से ही ऑनलाइन धोखाधड़ी सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्तमान में उसे पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए लुंगलेई के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (SDPO) आर. थांकिमा की अध्यक्षता में SIT का गठन किया गया है, जो पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है।
एसपी ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस धोखाधड़ी में जेल के अंदर किसी कर्मचारी या बाहर के किसी व्यक्ति की मिलीभगत थी या नहीं, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
जेल अधिकारियों के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा इस वर्ष की शुरुआत में शुरू हुआ था, लेकिन इसका खुलासा पिछले सप्ताह हुआ। मामला तब उजागर हुआ जब जिला और सत्र न्यायालय के अधिकारी उन रिकॉर्ड्स को नहीं खोज पाए जिनके आधार पर कैदियों की रिहाई हुई थी। इसके बाद 25 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
जेल प्रशासन ने बताया कि फर्जी आदेश इतने असली लग रहे थे कि प्रारंभिक जांच में भी उन्हें वैध माना गया। दस्तावेजों पर नकली मुहरें और सही प्रारूप का उपयोग किया गया था, जिसके कारण जेल प्रशासन को संदेह नहीं हुआ और कैदियों को रिहा कर दिया गया।
फिलहाल SIT इस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।





