
Mizoram मिजोरम: भारत सरकार ने मिज़ोरम में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD) के साथ लगभग 46 मिलियन डॉलर के वित्तीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल “फॉस्टरिंग क्लाइमेट रेज़िलिएंट अपलैंड फार्मिंग सिस्टम्स इन द नॉर्थईस्ट (FOCUS 2.0)” के नाम से शुरू की गई है। इसका उद्देश्य राज्य में टिकाऊ और बाजार-उन्मुख खेती को बढ़ावा देना है।
यह परियोजना 2026 से 2032 तक मिज़ोरम के सभी 11 जिलों में लागू की जाएगी। यह राज्य की “बाना काइह” नीति के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य आत्मनिर्भरता और सतत आजीविका को बढ़ावा देना है। साथ ही यह भारत के समावेशी और जलवायु-लचीले विकास के व्यापक उद्देश्यों के साथ भी जुड़ी हुई है।
FOCUS के पहले चरण (2018–2024) में उल्लेखनीय परिणाम सामने आए थे, जिसमें भाग लेने वाले किसानों की आय में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इस सफलता के आधार पर अब दूसरे चरण में इन मॉडलों का विस्तार किया जाएगा। अनुमान है कि इस परियोजना से लगभग 1.5 लाख लोग सीधे लाभान्वित होंगे।
यह कार्यक्रम छोटे किसानों को पारंपरिक निर्वाह खेती से हटाकर बाजार-आधारित उत्पादन प्रणाली की ओर ले जाने पर केंद्रित है। इसके तहत भंडारण, एकत्रीकरण और प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादों की वैल्यू चेन बेहतर हो सके। इसके अलावा किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमों को वित्तीय और तकनीकी सहायता भी प्रदान की जाएगी।
IFAD के इंडिया कंट्री डायरेक्टर मार्क डी सूसा शील्ड्स ने कहा कि यह पहल किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने में मदद करेगी। इसके लिए एकत्रीकरण प्रणाली, प्रोसेसिंग सेंटर और एग्रीबिजनेस कंपनियों के साथ औपचारिक साझेदारी विकसित की जाएगी।
मिज़ोरम में कृषि क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें छोटी और बिखरी हुई जोत, कम उत्पादकता और शिफ्टिंग खेती पर निर्भरता प्रमुख हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और सीमित बाजार ढांचा ग्रामीण आय को प्रभावित कर रहा है।
FOCUS 2.0 इन समस्याओं के समाधान के लिए जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों को बढ़ावा देगा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और वित्तीय तथा डिजिटल समावेशन को प्रोत्साहित करेगा।
इस पहल से स्वयं सहायता समूहों और किसान संगठनों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी बाजार तक पहुंच आसान होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। भारत और IFAD ने पिछले पांच दशकों में 36 ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर मिलकर काम किया है, जिनमें कुल 4.6 बिलियन डॉलर का निवेश शामिल है। वर्तमान में देश में चार IFAD समर्थित परियोजनाएं चल रही हैं।





