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मिजोरम में प्राकृतिक गैस की तलाश तेज
आइजोल: मिजोरम सरकार ने राज्य में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को नई गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने कोलासिब जिले के होर्टोकी क्षेत्र में एक नया खोजपूर्ण कुआं खोदने की योजना पर चर्चा की है। यह प्रस्तावित कुआं उस स्थान से लगभग दो किलोमीटर दूर होगा, जहां तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) ने वर्ष 2011-12 के दौरान प्राकृतिक गैस की खोज की थी। राज्य सरकार का उद्देश्य क्षेत्र में उपलब्ध हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाओं का पता लगाना और भविष्य में उनके व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं का आकलन करना है।
मिजोरम के वाणिज्य, उद्योग, भूविज्ञान एवं खनन विभाग के सचिव एच. लियानजेला की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को तेल और गैस खोज गतिविधियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें केंद्र सरकार के संबंधित विभागों और प्रमुख तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चल रही खोज गतिविधियों, तकनीकी चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
होर्टोकी में नए कुएं की योजना
बैठक के दौरान कोलासिब जिले के होर्टोकी क्षेत्र में नया खोजपूर्ण कुआं खोदने का प्रस्ताव प्रमुखता से सामने आया। यह इलाका मेइदुम के नजदीक स्थित है, जहां ONGC ने पहले गैस की खोज की थी।
अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित ड्रिलिंग स्थल तक भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया है। मेइदुम-होर्टोकी मार्ग पर छिमलुआंग नदी के पुल को वर्ष 2025 में भारी उपकरणों की आवाजाही के अनुकूल बनाया गया था।
इससे प्रस्तावित स्थल तक ड्रिलिंग मशीनों और अन्य जरूरी उपकरणों को पहुंचाने में सुविधा होगी। हालांकि, वास्तविक ड्रिलिंग शुरू करने के लिए संबंधित नियामकीय अनुमति आवश्यक होगी।
ONGC और OIL ने पेश की भविष्य की योजना
बैठक में ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के अधिकारियों ने संभावित तेल और गैस क्षेत्रों की पहचान से जुड़ी योजनाएं प्रस्तुत कीं। दोनों कंपनियों ने भविष्य में ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) के तहत नए क्षेत्रों में खोज की संभावनाओं पर चर्चा की।
ONGC ने वर्ष 2011 में मिजोरम में खोजपूर्ण ड्रिलिंग शुरू की थी। कंपनी ने असम सीमा के निकट कोलासिब जिले के मेइदुम और जानलॉन क्षेत्रों में कुएं खोदे थे।
वहीं, ऑयल इंडिया लिमिटेड ने आइजोल के निकट आइबॉक, सैतुअल जिले के केइफांग और सेरछिप जिले के थेनजॉल में खोज गतिविधियां संचालित की हैं।
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
विभागीय सचिव एच. लियानजेला ने कहा कि राज्य में पहले की खोज गतिविधियों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे। हालांकि, केंद्र सरकार, तेल कंपनियों और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से अब नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने तेल और गैस की खोज में आधुनिक तकनीक, उन्नत उपकरणों और विशेषज्ञों की सेवाओं का अधिक उपयोग करने पर जोर दिया।
बैठक में हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक (अन्वेषण) सोहबान पाठक सहित ONGC, OIL और इंद्रप्रस्थ गैस ग्रिड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने क्षेत्रीय सर्वेक्षणों के निष्कर्षों और राज्य में हाइड्रोकार्बन खोज की वर्तमान स्थिति की समीक्षा भी की।
दक्षिण मिजोरम में भी खोज बढ़ाने की तैयारी
राज्य सरकार केवल होर्टोकी क्षेत्र तक खोज गतिविधियों को सीमित नहीं रखना चाहती। बैठक में दक्षिण मिजोरम के राबुंग, त्लाबुंग और पालजॉन्ग-थिलत्लांग क्षेत्रों में भी तेल और प्राकृतिक गैस की खोज बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
इसके अलावा प्रस्तावित पानीसागर-सिह्मुई गैस पाइपलाइन परियोजना की समीक्षा की गई। इस पाइपलाइन को भविष्य में गैस संसाधनों के परिवहन और उपयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य सरकार और संबंधित कंपनियां इस बात का आकलन कर रही हैं कि संभावित गैस भंडारों का व्यावसायिक उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है। इससे पहले मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर होर्टोकी में प्रस्तावित ड्रिलिंग कार्य शीघ्र शुरू कराने का अनुरोध किया था। ONGC ने भी संबंधित खोज ब्लॉक की वैधता बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल होर्टोकी में नए कुएं की खुदाई प्रस्तावित है। इसकी शुरुआत की निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है। नई ड्रिलिंग से मिलने वाले वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ही क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की मात्रा और व्यावसायिक उत्पादन की संभावनाओं का आकलन किया जा सकेगा।
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