मिज़ोरम
राजभवन में CRPF जवान की मौत, ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मारने की आशंका, जांच शुरू
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 8:55 PM IST

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आइजोल। मिजोरम की राजधानी आइजोल में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को एक दुखद घटना सामने आई है। राज्यपाल के आधिकारिक निवास राजभवन, जिसे अब लोक भवन के नाम से जाना जाता है, की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जवान की गोली लगने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जवान ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा अधिकारियों और स्थानीय पुलिस में हलचल मच गई। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतक जवान की पहचान 31 वर्षीय सुधीर स्वामी के रूप में हुई है। वह लोक भवन की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे गोली चलने की घटना हुई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का संदिग्ध मामला माना जा रहा है। हालांकि, मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
राज्यपाल का आधिकारिक निवास प्रदेश के महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों में शामिल है। यहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों की तैनाती की जाती है। ऐसे में परिसर की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात जवान की मौत की घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है।बताया जा रहा है कि जवान नियमित सुरक्षा ड्यूटी पर मौजूद था। इसी दौरान अचानक गोली चलने की घटना सामने आई। घटना के बाद परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। पुलिस और सुरक्षा बल के अधिकारी मामले की परिस्थितियों का पता लगाने में जुट गए हैं।
प्रारंभिक रिपोर्टों में जवान द्वारा स्वयं को गोली मारने की आशंका व्यक्त की गई है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्होंने कथित तौर पर ऐसा कदम क्यों उठाया। घटना से पहले उनकी मानसिक स्थिति कैसी थी, वह किसी व्यक्तिगत परेशानी से गुजर रहे थे या नहीं और ड्यूटी के दौरान कोई असामान्य परिस्थिति बनी थी या नहीं, इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा।घटना के संबंध में पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस तरह के मामलों में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, संबंधित कर्मियों के बयान और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर घटना के क्रम को समझने का प्रयास किया जाता है।
जवान की मौत ने सुरक्षा बलों में कार्यरत कर्मचारियों की मानसिक सेहत और कल्याण से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस विशेष घटना को किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या, पारिवारिक विवाद या ड्यूटी के दबाव से जोड़ने का अभी कोई पुष्ट आधार सामने नहीं आया है।सीआरपीएफ देश के प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल है। इसके जवान आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था में सहायता और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सहित विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हैं। कई जवानों को लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी करनी पड़ती है।
सुरक्षा बलों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, पर्याप्त विश्राम और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यस्थल पर ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां कर्मचारी बिना किसी संकोच के अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर सहायता प्राप्त कर सकें।इस घटना के बीच केंद्रीय सुरक्षा बलों में आत्महत्या के मामलों को लेकर पहले सामने आए आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अगस्त 2026 में सीआरपीएफ कर्मियों की आत्महत्या से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग के अनुसार, जनवरी से 22 मई 2026 के बीच 19 सीआरपीएफ जवानों की आत्महत्या की खबरें सामने आई थीं।
आयोग ने यह भी बताया था कि सीआरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 59 जवानों की आत्महत्या से मौत हुई थी। पिछले पांच वर्षों में यह सबसे अधिक संख्या बताई गई। आयोग ने इस विषय को गंभीर मानते हुए केंद्रीय गृह सचिव और सीआरपीएफ महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।हालांकि, इन राष्ट्रीय आंकड़ों और आइजोल में हुई ताजा घटना के बीच किसी सीधे संबंध का दावा नहीं किया जा सकता। प्रत्येक घटना की परिस्थितियां अलग होती हैं और उनके कारणों का निर्धारण संबंधित जांच के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
मिजोरम में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सुरक्षा बलों के कर्मचारियों तक सहायता और परामर्श की सुविधाएं कितनी आसानी से पहुंच पाती हैं। जवानों को न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने की आवश्यकता होती है, बल्कि तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए भरोसेमंद सहायता व्यवस्था भी जरूरी होती है।महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों में तैनात जवानों पर सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे स्थानों पर नियमित सतर्कता और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। इसलिए जवानों के कल्याण और उनके लिए उपलब्ध सहयोग व्यवस्था पर लगातार ध्यान देना आवश्यक है।
फिलहाल आइजोल में हुई घटना के संबंध में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौके से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं। मृतक जवान के परिवार से संबंधित विस्तृत जानकारी भी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है। ऐसे में घटना के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई। संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे जारी होने वाली जानकारी से मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।मिजोरम के राज्यपाल के आधिकारिक निवास पर तैनात सीआरपीएफ जवान की मौत एक दुखद घटना है। फिलहाल प्राथमिकता घटना की निष्पक्ष जांच और मृतक के परिजनों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। इस मामले का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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