मिज़ोरम

कीटों से बर्बाद हो रही फसल: मिज़ोरम CM ने केंद्र से मांगा सहयोग

Tara Tandi
10 Oct 2026 3:23 PM IST
कीटों से बर्बाद हो रही फसल: मिज़ोरम CM ने केंद्र से मांगा सहयोग
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आइजोल: मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार सुपारी की खेती को मज़बूत करने के लिए आर्थिक मदद और वैज्ञानिक तरीकों पर विचार कर रही है, क्योंकि इस फसल पर कीड़ों का गंभीर हमला हुआ है, जिससे 2021 के आसपास से ही बागान प्रभावित हो रहे हैं।
वैज्ञानिक तरीके से सुपारी की खेती और कीड़ों के प्रबंधन पर एक ट्रेनिंग-सह-सेमिनार का उद्घाटन करते हुए, लालदुहोमा ने कहा कि मिजोरम में सुपारी के बागान लगभग 67,380 हेक्टेयर में फैले हुए हैं और 2025-26 में इसका उत्पादन 5.12 लाख क्विंटल होने का अनुमान है।
उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि देश में सुपारी उत्पादन करने वाले राज्यों में मिजोरम पांचवें स्थान पर है और कहा कि इच्छुक किसान राज्य की प्रमुख "बाना काइह" (Bana Kaih) या हैंडहोल्डिंग योजना और मुख्यमंत्री के विशेष पैकेज के तहत मदद ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के भूमि संसाधन, मृदा और जल संरक्षण विभाग के अधिकारियों और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सुपारी और मसाला विकास निदेशालय के वैज्ञानिकों ने कीड़ों के हमले की फील्ड जांच की है।
उन्होंने कहा कि इसके संभावित कारणों की पहचान करने और नियंत्रण के उपाय सुझाने वाली एक रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपने के लिए तैयार की जा रही है, और उन्हें उम्मीद है कि इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र से मदद मिलेगी।
लालदुहोमा ने कहा कि सरकार ICAR-केंद्रीय बागानी फसल अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPCRI) के साथ मिलकर सुपारी के साथ कोको की मिश्रित खेती (intercropping) करने पर भी विचार कर रही है।
उन्होंने किसानों से खेती के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने और बागान प्रबंधन व उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह मानने का आग्रह किया।
बेहतर कृषि बुनियादी ढांचे और इनपुट की ज़रूरत को मानते हुए, लालदुहोमा ने कहा कि सरकार कीड़ों को नियंत्रित करने वाली दवाओं, उर्वरकों, सिंचाई सुविधाओं और बागानों तक पहुँचने वाली सड़कों के लिए किसानों की मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रही है।
उन्होंने बताया कि सुपारी, रबर और ब्रूम घास के बागानों तक पहुँचने के लिए अलग-अलग जगहों पर 170 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाने के लिए नाबार्ड (NABARD) और राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता (SASCI) योजना के ज़रिए 27.66 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई है।
लालदुहोमा ने यह भी कहा कि सरकार सुपारी, रबर और कॉफी के बागानों के लिए कार्बन-वित्त (carbon-finance) के अवसरों पर विचार कर रही है, क्योंकि ये कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं और जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि कार्बन-ट्रेडिंग एजेंसियों और कार्बन एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत चल रही है और इस पहल से प्लांटेशन मालिकों को कार्बन क्रेडिट के ज़रिए अतिरिक्त आय हो सकती है।
इस कार्यक्रम में शामिल हुए भूमि संसाधन, मृदा और जल संरक्षण मंत्री लालथांसांगा ने किसानों को सरकार का VIP बताया और कहा कि वैज्ञानिक और रिसर्च पर आधारित खेती को बढ़ावा देने की कोशिशें की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने से किसानों को अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और उन्होंने किसानों से ट्रेनिंग का असरदार ढंग से इस्तेमाल करने की अपील की।
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