मेघालय

PGI 2.0 रिपोर्ट: मेघालय स्कूल शिक्षा रैंकिंग में सबसे नीचे, प्रदर्शन में मामूली सुधार

Kavita2
25 May 2026 5:18 PM IST
PGI 2.0 रिपोर्ट: मेघालय स्कूल शिक्षा रैंकिंग में सबसे नीचे, प्रदर्शन में मामूली सुधार
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Meghalaya मेघालय: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा से जुड़े नवीनतम नेशनल असेसमेंट में मेघालय ने देश में सबसे निचला स्थान प्राप्त किया है। परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 की इस रिपोर्ट में राज्य का प्रदर्शन 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे कमजोर पाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मेघालय को 1,000 में से 417.9 अंक मिले हैं, जिससे यह सबसे निचली ग्रेडिंग कैटेगरी में शामिल एकमात्र राज्य बन गया है। हालांकि पिछले मूल्यांकन वर्ष 2022-23 में राज्य का स्कोर 401.6 था, जिसमें कुछ सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन यह सुधार रैंकिंग में किसी बड़े बदलाव के लिए पर्याप्त नहीं रहा।

PGI 2.0 एक व्यापक मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें स्कूल शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मानकों का आकलन किया जाता है। इसमें छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धि, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा तक पहुंच, प्रशासनिक व्यवस्था, समानता और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे प्रमुख पैरामीटर शामिल होते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी मानकों पर मेघालय का समग्र प्रदर्शन अन्य राज्यों की तुलना में कमजोर पाया गया है। विशेष रूप से शिक्षा की गुणवत्ता, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में राज्य को सुधार की आवश्यकता बताई गई है।

हालांकि राज्य के स्कोर में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन यह सुधार रैंकिंग में महत्वपूर्ण बदलाव नहीं ला सका। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए लंबे समय तक निरंतर प्रयासों की जरूरत है, जिसमें जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा।

रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि देश के कई राज्य शिक्षा क्षेत्र में लगातार सुधार कर रहे हैं, जबकि कुछ राज्य अब भी बुनियादी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। मेघालय का मामला इसी असमानता को उजागर करता है।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य को स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने, डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने की दिशा में और अधिक काम करने की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार की इस रिपोर्ट का उद्देश्य राज्यों को उनके प्रदर्शन का आकलन कर सुधार के लिए मार्गदर्शन देना है, ताकि पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

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