मेघालय

BJP-UDP की बढ़त पर पाला का दावा 2028 चुनाव होगा असली परीक्षा

nidhi
27 Sept 2026 9:00 AM IST
BJP-UDP की बढ़त पर पाला का दावा 2028 चुनाव होगा असली परीक्षा
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मेघालय में 2028 की सियासी लड़ाई
शिलांग: मेघालय कांग्रेस अध्यक्ष विंसेंट एच पाला ने भारतीय जनता पार्टी की हालिया राजनीतिक बढ़त पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसका असली परीक्षण 2028 के विधानसभा चुनाव में होगा। उनका यह बयान यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद आया है। आठ विधायकों के आने से 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में भाजपा की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है।
पाला ने शिलांग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि निर्वाचित विधायकों का किसी पार्टी में शामिल होना और चुनाव में जनता का समर्थन हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं। उनके मुताबिक भाजपा को 2028 के विधानसभा चुनाव में यह साबित करना होगा कि विधायकों की बढ़ी हुई संख्या मतदाताओं के समर्थन में भी बदलती है या नहीं। यह पाला और कांग्रेस का राजनीतिक आकलन है, चुनावी नतीजे भविष्य में मतदाताओं के फैसले से तय होंगे।
UDP के आठ विधायकों के भाजपा में जाने के बाद राज्य की विधानसभा में राजनीतिक समीकरण बदले हैं। भाजपा की संख्या अब 10 हो गई है, जबकि UDP की संख्या घटकर चार रह गई है। भाजपा और UDP दोनों ही मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाले मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा रहे हैं।
पाला ने भाजपा की बढ़ी हुई विधायी ताकत को उसके जनसमर्थन का निश्चित संकेत मानने से इनकार किया। उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि उस चुनाव में भाजपा ने दो सीटें जीती थीं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार उस चुनाव में भाजपा को करीब 9.3 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस ने पांच सीटें जीती थीं और उसे करीब 13.2 प्रतिशत वोट मिले थे। हालांकि बाद के राजनीतिक बदलावों के कारण वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है।
पाला ने कहा कि कांग्रेस 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपने समर्थन आधार को मजबूत करने पर ध्यान देगी। उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बीच हुए हालिया राजनीतिक बदलावों की भी आलोचना की और आठ UDP विधायकों के भाजपा में शामिल होने के तरीके पर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, भाजपा में शामिल हुए UDP नेताओं ने अपने फैसले को राज्य के हित से जोड़ा है। भाजपा में शामिल विधायक लखमेन रिंबुई ने कहा था कि यह निर्णय लोगों और मेघालय के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने भी कहा है कि इस बदलाव से सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिरता प्रभावित नहीं होगी।
अब मेघालय की राजनीति में निगाहें 2028 के विधानसभा चुनाव पर हैं, जब मतदाता नई विधानसभा चुनेंगे और हालिया दल-बदल के चुनावी असर की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
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