मेघालय

मेघालय में 13 लाख टन से ज़्यादा कोयला गायब, HC पैनल ने जांच की मांग की

Tara Tandi
8 Oct 2026 3:11 PM IST
मेघालय में 13 लाख टन से ज़्यादा कोयला गायब, HC पैनल ने जांच की मांग की
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गुवाहाटी: मेघालय हाई कोर्ट की बनाई एक कमिटी ने पाया है कि राज्य में 13 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा कोयले का कोई हिसाब-किताब नहीं है, जबकि कोर्ट के बार-बार आदेश देने के बावजूद बंद पड़ी 'रैट-होल' खदानों के मुहानों को सुरक्षित नहीं किया गया है।
यह जानकारी रिटायर्ड जस्टिस बी.पी. कटाकी की अध्यक्षता वाली कमिटी की 41वीं अंतरिम रिपोर्ट में सामने आई है। कमिटी ने इस बात की विस्तृत जांच की मांग की है कि गायब कोयले और अवैध माइनिंग से निपटने में लगातार हो रही नाकामियों के लिए कौन ज़िम्मेदार है।
मेघालय हाई कोर्ट ने अप्रैल 2022 में यह एक-सदस्यीय कमिटी बनाई थी। इसका काम सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उन निर्देशों के पालन की निगरानी करना था जो अवैज्ञानिक और अवैध 'रैट-होल' कोयला माइनिंग से जुड़े मामलों में जारी किए गए थे।
यह कार्रवाई कई सालों तक चले कानूनी विवाद के बाद हुई। खदानों में जानलेवा हादसों और पर्यावरण को हुए नुकसान के कारण 2014 में 'रैट-होल' माइनिंग पर रोक लगा दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में इस रोक में बदलाव किया और पहले से निकाले गए कोयले की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार को सौंप दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इसे तय शर्तों के तहत नीलामी के लिए 'कोल इंडिया लिमिटेड' को सौंप दिया जाए।
राज्य सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट को एक हलफ़नामे में बताया था कि 32,56,715 मीट्रिक टन निकाला हुआ कोयला मौजूद है।
बाद में हवाई सर्वे में यह मात्रा काफ़ी कम पाई गई, जबकि डिप्टी कमिश्नरों की भौतिक जांच में 19,54,258.816 मीट्रिक टन कोयला मिला।
इस तरह 13,02,456.184 मीट्रिक टन का अंतर सामने आया; इस कमी पर किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई है।
कमिटी ने कहा कि इस अंतर की विस्तृत जांच ज़रूरी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को ही कोयले की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सौंपी थी।
अगर एक गाड़ी में 25 टन कोयला ले जाया जाए, तो हिसाब-किताब से बाहर इस कोयले की मात्रा लगभग 52,000 ट्रक-लोड के बराबर होगी। इतनी मात्रा को रोज़ाना 100 ट्रकों की रफ़्तार से ढोने में 500 से ज़्यादा दिन लगेंगे। राज्य ने पहले इस अंतर का कुछ कारण फ़िज़िकल माप और ड्रोन-आधारित सर्वे के बीच के फ़र्क को बताया था, साथ ही उस कोयले का भी ज़िक्र किया था जिसकी नीलामी या ज़ब्ती हो चुकी थी। हालाँकि, समिति ने इन स्पष्टीकरणों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है।
रिपोर्ट में 37,449.53 मीट्रिक टन अवैध रूप से निकाले गए कोयले का भी ज़िक्र है, जो कोल इंडिया लिमिटेड के तय डिपो के बाहर पाया गया था और बाद में गायब हो गया। शुरू में सिर्फ़ 4,141.83 मीट्रिक टन के लिए पुलिस केस दर्ज किए गए थे।
बाद में सरकार ने समिति को बताया कि पूरी मात्रा के लिए केस दर्ज कर लिए गए हैं। हालाँकि, केस जल्दी दर्ज करने और जांच पूरी करने के पिछले निर्देशों के बावजूद, पुलिस स्टेशन के केस नंबर और जांच की प्रगति का विवरण अभी तक नहीं सौंपा गया है।
रिपोर्ट में उठाया गया एक और अहम मुद्दा बंद पड़ी 'रैट-होल' खदानों के आस-पास सुरक्षा की कमी है। अदालतों और समिति के बार-बार निर्देशों के बावजूद, खदान के किसी भी मुहाने को बंद या घेराबंदी नहीं की गई है।
कई डिप्टी कमिश्नरों ने घेराबंदी के लिए प्रस्ताव सौंपे हैं, जबकि ओवरसाइट कमेटी स्थायी रूप से बंद करने के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट की जांच कर रही है। अभी तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया गया है।
राज्य ने मेघालय की जटिल ज़मीन के मालिकाना हक़ की व्यवस्था (जिसमें निजी, कबीले और पारंपरिक मालिकाना हक़ शामिल हैं) और दूर-दराज़ इलाकों में घेराबंदी के क्षतिग्रस्त होने की संभावना का हवाला दिया है। समिति ने फिर से बंद पड़ी हर खदान के मुहाने को सुरक्षित करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा की मांग की है, साथ ही स्थायी उपाय पूरे होने तक अस्थायी घेराबंदी करने को कहा है।
रिपोर्ट में सितंबर की शुरुआत में पूर्वी जयंतिया हिल्स के सखैन गांव में अवैध खनन के एक नए संदिग्ध मामले का भी ज़िक्र है। खुदाई का एक नया गड्ढा मिलने के बाद पुलिस ने ख्लिहरियात पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की।
मौके की तस्वीरों में खनन के उपकरण दिखे, लेकिन पुलिस रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि उपकरण ज़ब्त किए गए थे।
समिति ने ज़ब्ती के बाद की कार्रवाई में भी कमियां पाई हैं। 2023 से 2026 के बीच, अधिकारियों ने अवैध खनन और परिवहन से जुड़े मामलों में 62 वाहन और 92 उपकरण ज़ब्त किए।
फिर भी, माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट के तहत ज़ब्ती की कार्रवाई सिर्फ़ एक मामले में शुरू की गई। ज़मीन मालिकों के ख़िलाफ़ बहुत कम कार्रवाई हुई है, और खदान मालिकों से जुड़ी कानूनी कार्यवाही भी सीमित रही है।
माइनिंग और जियोलॉजी विभाग ने अवैध खनन और ट्रांसपोर्टेशन को रोकने, उसका पता लगाने और उसे कंट्रोल करने के लिए एक डिटेल्ड प्लान तैयार किया है, जिसे अभी सक्षम अधिकारी की मंज़ूरी का इंतज़ार है। इस प्लान में संवेदनशील इलाकों को शामिल किया गया है और अधिकारियों को ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।
राज्य और ज़िला स्तर पर जन-शिकायत समितियों के प्रस्तावों को भी अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। प्रस्तावित सिस्टम में व्हिसल-ब्लोअर्स (सूचना देने वालों) की सुरक्षा और शिकायतों के समाधान के लिए समय-सीमा तय करने जैसी बातें शामिल हैं।
अवैध खदानों में दुर्घटनाओं से प्रभावित लोगों को अनुग्रह राशि (ex-gratia) देने के लिए एक अलग पॉलिसी पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इसे अभी अंतिम मंज़ूरी नहीं मिली है।
दुर्बा राय के परिवार को मुआवज़ा मिलने का मामला भी लंबित है; उनका शव हाल ही में बरामद किया गया था।
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