
Meghalaya मेघालय: मेघालय में जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत खुद से गिनती (सेल्फ-एन्यूमरेशन) की प्रक्रिया शुक्रवार, 1 मई से शुरू कर दी गई है। यह जानकारी शिलांग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में दी गई, जिसे प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) और डायरेक्टरेट ऑफ सेंसस ऑपरेशंस, मेघालय ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था।
इस अवसर पर मेघालय के सेंसस ऑपरेशंस के निदेशक बिस्वजीत पेगु ने बताया कि सेंसस 2027 देश की 16वीं और आज़ादी के बाद 8वीं जनगणना होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया भारत की जनसंख्या डेटा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पेगु ने जानकारी दी कि इस बार पहली बार पूरी जनगणना प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जाएगी। इसमें डेटा संग्रह, प्रोसेसिंग और विश्लेषण सभी कार्य मोबाइल एप्लिकेशन और सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। इससे प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि 1 मई से 15 मई तक नागरिक स्वयं अपने घरों से संबंधित जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। इस प्रक्रिया के बाद जनगणना कर्मी फील्ड विजिट के दौरान इन जानकारियों का सत्यापन करेंगे।
जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में सेल्फ-एन्यूमरेशन और हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) शामिल है। HLO चरण 16 मई से 14 जून तक चलेगा, जिसमें अधिकारी 33 प्रश्नों वाले फॉर्मेट के जरिए घरों की स्थिति, संपत्ति और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी एकत्र करेंगे।
दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में किया जाएगा। इसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल प्रणाली के उपयोग से डेटा की सटीकता में सुधार होगा और प्रोसेसिंग तेजी से पूरी की जा सकेगी, जिससे जनगणना के परिणाम समय पर जारी किए जा सकेंगे।
पेगु ने यह भी बताया कि डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी और केवल समेकित (समरी लेवल) डेटा ही नीति निर्माण और योजना के लिए जारी किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में एकत्र किए गए मोबाइल नंबरों का उपयोग केवल सत्यापन और संचार उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
जनगणना कार्य के लिए पूरे राज्य में लगभग 9,000 कर्मियों को तैनात किया जाएगा, जिनमें एन्यूमरेटर और सुपरवाइज़र शामिल होंगे। पूरी प्रक्रिया की निगरानी मल्टी-टियर सिस्टम के तहत की जाएगी ताकि डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
इसके अलावा, जनगणना में सभी नियमित और संस्थागत घरों को शामिल किया जाएगा, जबकि विदेशी नागरिकों और राजनयिक स्टाफ को हाउस लिस्टिंग चरण में शामिल नहीं किया जाएगा।
लोगों की सहायता के लिए सरकार ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से नागरिक जनगणना से जुड़े सवालों के जवाब प्राप्त कर सकते हैं और प्रक्रिया से संबंधित जानकारी ले सकते हैं।





