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Meghalaya : हैली वार को पद्मश्री, लिविंग रूट ब्रिज संरक्षण में योगदान के लिए सम्मान

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26 May 2026 4:46 PM IST
Meghalaya :  हैली वार को पद्मश्री, लिविंग रूट ब्रिज संरक्षण में योगदान के लिए सम्मान
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Meghalaya मेघालय : मेघालय के प्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षक हैली वार को 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें राज्य की अनोखी धरोहर लिविंग रूट ब्रिज के संरक्षण और उनके जीवनभर के योगदान के लिए प्रदान किया गया। इस उपलब्धि को राज्य के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है।

हैली वार ने अपने पूरे जीवन को मेघालय की पारंपरिक और प्राकृतिक विरासत को बचाने के कार्य में समर्पित किया है। विशेष रूप से उन्होंने रबर अंजीर (Rubber Fig) के पेड़ों की जड़ों को संरक्षित कर उनसे बने लिविंग रूट ब्रिज को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन पुलों को स्थानीय भाषा में ‘जिंगकिएंग ज्री’ कहा जाता है, जो न केवल इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरण हैं बल्कि प्रकृति और मानव सहयोग का भी प्रतीक हैं।

ये जीवित जड़ पुल वर्षों तक धीरे-धीरे पेड़ों की हवाई जड़ों को दिशा देकर बनाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय समुदाय पीढ़ियों से उपयोग करता आ रहा है। हैली वार ने दशकों तक इन परंपरागत पुलों के संरक्षण और विस्तार के लिए काम किया है, जिससे यह दुर्लभ सांस्कृतिक धरोहर आज भी सुरक्षित है।

इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हैली वार को पद्मश्री दिए जाने को राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन सभी लोगों को प्रेरित करेगा जो पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री संगमा ने अपने संदेश में हैली वार के साथ अपने अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सीज गांव का दौरा किया था, तब वे वार के ज्ञान, विनम्रता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता से बेहद प्रभावित हुए थे। उनके अनुसार, वार का काम केवल एक व्यक्ति का प्रयास नहीं बल्कि पूरी समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का प्रयास है।

ईस्ट खासी हिल्स जिले के सीज गांव के निवासी हैली वार ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा इन जीवित पुलों के निर्माण और संरक्षण में लगाया है। उनके प्रयासों से न केवल स्थानीय परंपरा को संरक्षित किया गया है, बल्कि यह कार्य आज विश्व स्तर पर भी पर्यावरणीय संरक्षण के एक अनूठे मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

लिविंग रूट ब्रिज मेघालय की पहचान बन चुके हैं और पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन पुलों की विशेषता यह है कि ये समय के साथ मजबूत होते जाते हैं और सदियों तक उपयोग में रह सकते हैं।

कुल मिलाकर, हैली वार को मिला पद्मश्री सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे मेघालय और भारत की उस परंपरा और ज्ञान को भी सम्मान देता है, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

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