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Shillong शिलांग: विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill 2026) को लेकर मेघालय सरकार ने अपनी चिंता जाहिर की है। राज्य के मंत्री लाहकमेन रिम्बुई ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन को लेकर मेघालय के लोगों को गंभीर आपत्तियां हैं और राज्य सरकार इस मुद्दे पर अपनी बात मजबूती से रखेगी।
मंत्री रिम्बुई ने कहा कि एफसीआरए कोई नया कानून नहीं है। इसे पहली बार वर्ष 1976 में लागू किया गया था। बाद में 2010 में पुराने कानून को निरस्त कर नया एफसीआरए अधिनियम लागू किया गया और वर्ष 2020 तक इसमें कई संशोधन किए गए। अब मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, FCRA संशोधन विधेयक 2026 को अगले सप्ताह संसद में पेश किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मेघालय जैसे राज्यों में कई सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संस्थाएं विदेशी सहायता के माध्यम से विभिन्न जनकल्याणकारी कार्य करती हैं। ऐसे में यदि नए संशोधन से इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, तो इसका असर राज्य के विकास और सामाजिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
रिम्बुई ने कहा कि मेघालय के लोगों की कुछ वास्तविक चिंताएं हैं, जिन्हें केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। उनका कहना था कि किसी भी संशोधन से पहले राज्यों और संबंधित हितधारकों की राय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि विकास कार्यों और सामाजिक सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
हालांकि, प्रस्तावित संशोधन विधेयक के प्रावधान अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ऐसे में राज्य सरकार इसके अंतिम मसौदे का अध्ययन करने के बाद विस्तृत प्रतिक्रिया देगी। इस बीच, एफसीआरए संशोधन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
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