
Meghalaya मेघालय: मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य में खनिज परिवहन (मिनरल मूवमेंट) से जुड़ी स्टेट ट्रांसपोर्ट रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि पेश किया गया डेटा एक जैसा नहीं लग रहा है और इसमें कई विसंगतियां दिखाई दे रही हैं। इस मामले में अधिकारियों से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला PIL नंबर 4/2026 के तहत सुनवाई में आया, जिसमें राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच कुल 2,030 वाहनों ने 25,902 मीट्रिक टन खनिज पदार्थों का परिवहन किया। इसमें जैंतिया हिल्स टेरिटोरियल डिवीजन से प्रतिदिन औसतन सात से भी कम वाहनों के संचालन का उल्लेख किया गया था।
हालांकि, कोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट के साथ संलग्न चार्ट और प्रस्तुत आंकड़ों में स्पष्ट विरोधाभास है। बेंच ने कहा कि दिए गए बयान और आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल ने इस पर निर्देश लेने के लिए समय मांगा।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि उपलब्ध डेटा “पूरी तरह उल्टा” प्रतीत होता है और इससे यह आशंका भी उत्पन्न होती है कि न्यायालय को गलत जानकारी दी गई हो सकती है।
सुनवाई के दौरान एनफोर्समेंट की कमियों पर भी ध्यान दिया गया। अदालत ने कहा कि कुछ वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट के उल्लंघन में जुर्माना लगाया गया है, लेकिन 22 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 के बीच दर्ज मामलों या मुकदमों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि नियम तोड़ने वाले वाहन पहली बार दोषी थे या बार-बार उल्लंघन कर रहे थे।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या राज्य में वाहनों, जुर्मानों और बार-बार अपराधों को ट्रैक करने के लिए कोई केंद्रीकृत डेटाबेस मौजूद है या नहीं।
इसके अलावा, बॉर्डर अथॉरिटी की ओर से दायर अलग रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी भूमिका केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है और उनके पास लाइसेंस, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट या फिटनेस दस्तावेज जांचने का अधिकार नहीं है।
अदालत ने राज्य के संबंधित विभागों और लैंड कस्टम स्टेशन को आगे जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामले में सहायता के लिए फिलेमोन नोंगब्री को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और फॉरेस्ट विभाग के सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी, जिसमें विस्तृत रिपोर्ट और स्पष्टीकरण पेश किए जाएंगे।





