मेघालय
मेघालय HC का आदेश: तीन महीने में दें सीमा बाड़बंदी का मुआवजा
Tara Tandi
3 Oct 2026 2:49 PM IST

x
गुवाहाटी: मेघालय हाई कोर्ट के आदेश के बाद, साउथ वेस्ट गारो हिल्स में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर फेंसिंग (बाड़ लगाने) के लिए ली गई ज़मीन के मालिकों को तीन महीने के अंदर मुआवज़ा मिलेगा।
कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों से उन मुद्दों को सुलझाने के लिए कहा है जिनकी वजह से ड्राफ्ट अवार्ड (मुआवज़े का प्रस्ताव) तैयार और मंज़ूर होने के बावजूद पेमेंट में देरी हुई है।
जस्टिस बी. भट्टाचार्जी ने कहा कि सरकार बिना किसी कानूनी वजह के प्राइवेट ज़मीन पर कब्ज़ा करके मालिकों को कई सालों तक मुआवज़े के लिए इंतज़ार नहीं करवा सकती।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति, जिसमें कब्ज़ा तो ले लिया जाए लेकिन बिना कानूनी आधार के पेमेंट रोक दिया जाए, अधिकार का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं की ज़मीन 2017-18 में 'ज़मीन अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के तहत बॉर्डर फेंसिंग प्रोजेक्ट के लिए ली गई थी।
अधिकारियों ने 2018 में ड्राफ्ट अवार्ड तैयार करके मंज़ूर कर लिए थे, लेकिन प्रभावित ज़मीन मालिकों को मुआवज़े का पेमेंट अभी तक नहीं किया गया था।
ज़मीन मालिकों की तरफ़ से कई बार कहने के बावजूद देरी होती रही, जिसके बाद उन्होंने बकाया मुआवज़ा दिलाने के लिए मेघालय हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने पाया कि ड्राफ्ट अवार्ड कई साल पहले तैयार होने के बावजूद अधिकारियों ने पेमेंट नहीं किया था।
कोर्ट ने मुआवज़े को इतने लंबे समय तक रोके रखने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच प्रशासनिक मतभेदों को भी पर्याप्त आधार नहीं माना।
कोर्ट ने कहा कि जब सरकार किसी की प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर लेती है, तो ज़मीन मालिकों को सालों तक मुआवज़े से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए, जब तक कि ऐसा करने का कोई ठोस कानूनी आधार न हो।
इसके बाद, राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों को बकाया मुद्दों को सुलझाने और प्रभावित ज़मीन मालिकों को मुआवज़ा देने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
Next Story





