मेघालय

मेघालय सरकार की कार्रवाई, रोपवे साइट मामले में KHADC इंस्पेक्टर पर केस

nidhi
29 Oct 2026 12:40 PM IST
मेघालय सरकार की कार्रवाई, रोपवे साइट मामले में KHADC इंस्पेक्टर पर केस
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शिलांग पीक रोपवे साइट को लेकर केस दर्ज
गुवाहाटी: मेघालय सरकार ने खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (KHADC) के एक इंस्पेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस इंस्पेक्टर ने 151 करोड़ रुपये की शिलॉन्ग पीक रोपवे परियोजना के 'लोअर टर्मिनल' वाली जगह को जब्त कर उसे सील कर दिया था।
पर्यटन विभाग की कमिश्नर और सचिव आर.एम. कुर्बाह ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस जब्ती में शामिल व्यक्ति के खिलाफ लबान पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कुर्बाह ने स्पष्ट किया कि मदान लबान में मौजूद यह जगह सरकारी संपत्ति है और इस परियोजना पर अभी तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
वहां चल रही गतिविधियों के बारे में बताते हुए कुर्बाह ने कहा कि पर्यटन विभाग इस जमीन का इस्तेमाल शुरुआती तैयारियों के लिए एक अस्थायी कैंप बनाने के लिए कर रहा था। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले मिट्टी की जांच (soil testing), पहुंच मार्ग (approach road) बनाने और जमीन को समतल करने के लिए ये इंतजाम जरूरी थे।
उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों का मकसद यह सुनिश्चित करना भी था कि 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना के तहत पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन हो।
कुर्बाह ने उन आरोपों को खारिज किया कि रोपवे के छह खंभों के लिए नींव खोदी गई है, या लोअर टर्मिनल और प्रस्तावित टावर वाली जगहों पर काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा, "अब तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है।"
उन्होंने इस जगह को जब्त करने और सील करने की कार्रवाई को 'अनधिकृत' (बिना अनुमति के) बताया। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी सरकारी संपत्ति पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कब्जा नहीं किया जा सकता।
कुर्बाह ने स्पष्ट किया कि यह FIR उस व्यक्ति के खिलाफ है जिसने जगह को जब्त किया था, न कि पूरी KHADC संस्था के खिलाफ। विभाग ने इस संपत्ति का नियंत्रण वापस पाने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं।
परियोजना को लागू करने वाली कंपनी के 'ट्रेडिंग लाइसेंस' को लेकर जताई गई चिंताओं पर कुर्बाह ने कहा कि सरकार ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद 25 अक्टूबर, 2025 को 'वर्क ऑर्डर' जारी किया था। उनके अनुसार, ठेकेदार ने 4 मई 2026 को संबंधित 'डोरबार' (स्थानीय परिषद) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किया और 18 मई को KHADC (खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद) में व्यापार लाइसेंस के लिए आवेदन किया।
इसके बाद, कंपनी ने 16 जुलाई को 'हिमा मायलीम' के 'सिएम' (प्रमुख) से एक और अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा। बाद में, 28 सितंबर को उन्हें अन्य मंजूरियां भी मिलीं, जिसमें 'पांच शनोंग' (स्थानीय बस्तियों) और 'लाबन-मायलीम' के 'ग्यारह कुर' (वंश समूहों) के डोरबार से मिली मंजूरी भी शामिल थी।
कुरबाह ने बताया कि लाइसेंसिंग की प्रक्रिया मई से ही चल रही है, और इसे आवश्यक अनुमतियों के बिना निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जन-परामर्श (public consultation) को लेकर जताई गई चिंताओं पर कुरबाह ने कहा कि रोपवे परियोजना की प्रक्रिया, राजमार्गों जैसी पारंपरिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया से अलग है।
उन्होंने बताया कि 'मेघालय इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कॉरपोरेशन' ने संबंधित डोरबारों के साथ बातचीत की है। उन्होंने आगे कहा कि 2022 में 'रेड लाबन' के साथ परामर्श किया गया था, और उस समय कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी।
कुरबाह ने पास के 'लुम शिलॉन्ग' जल संग्रहण क्षेत्र (water catchment area) को लेकर जताई गई चिंताओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इन चिंताओं के बारे में संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) को पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित टावर पहाड़ी की चोटी (रिज) के किनारे लगाए जाएंगे, जिससे जल स्रोत पर वैसा कोई असर नहीं पड़ेगा जैसा कि कुछ आपत्तिकर्ताओं ने दावा किया है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार रोपवे परियोजना को रोक देगी, तो कुरबाह ने कहा कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बातचीत और चर्चा आगे बढ़ेगी, सरकार आने वाले दिनों में स्थिति का आकलन करेगी।
151 करोड़ रुपये की 'शिलॉन्ग पीक रोपवे परियोजना' को साइट, लाइसेंसिंग और परामर्श प्रक्रिया को लेकर आपत्तियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, सरकार का कहना है कि निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है, और केवल परियोजना की जरूरतों के अनुसार प्रारंभिक गतिविधियां की जा रही हैं।
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