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Shillong शिलांग। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि समाज में सबसे बड़ा बदलाव लोगों की सोच में परिवर्तन से ही संभव है। उन्होंने कहा कि समावेशी समाज की शुरुआत इस बात से होती है कि हम विशेष जरूरतों वाले लोगों को कैसे देखते और उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। मुख्यमंत्री तुरा के दानाकग्रे में मॉन्टफोर्ट टीचर ट्रेनिंग कॉलेज फॉर स्पेशल एजुकेशन के सिल्वर जुबली समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में इस संस्थान ने पूर्वोत्तर में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि जब इस कॉलेज की स्थापना हुई थी, तब क्षेत्र में विशेष शिक्षा के लिए कोई समर्पित प्रशिक्षण संस्थान नहीं था। ऐसे में यह पहल चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ दूरदर्शी भी थी और इसने अन्य संस्थानों के लिए आधार तैयार किया। संगमा ने कहा कि किसी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, व्यक्तिगत चुनौतियां या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर उसके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने गरिमा और समानता को एक प्रगतिशील समाज की आधारशिला बताया।
मुख्यमंत्री ने सरकार के ‘मदर्स’ कार्यक्रम (मेघालय: स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण में परिणाम-आधारित परिवर्तन) का भी जिक्र किया, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में समन्वित तरीके से काम करता है और जिसमें माताओं को बदलाव के केंद्र में रखा गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समग्र मॉडल लंबे समय से चर्च और अन्य आस्था-आधारित संस्थाओं द्वारा भी अपनाए जाते रहे हैं। संगमा ने विभिन्न संस्थाओं और हितधारकों से आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि सभी का लक्ष्य समाज का कल्याण ही है।
कार्यक्रम में बिशप एंड्रयू आर. मारक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने संस्थान के योगदान और समावेशी शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। गौरतलब है कि 1985 में स्थापित मॉन्टफोर्ट सेंटर फॉर एजुकेशन आज दिव्यांग बच्चों के लिए एक प्रमुख संस्थान बन चुका है। 1999 में कॉलेज की स्थापना के बाद से अब तक 600 से अधिक विशेष शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान में यह केंद्र 200 से अधिक विशेष जरूरतों वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ते हुए 1,000 से अधिक छात्रों के साथ समावेशी शिक्षा का सफल मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।
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