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मेघालय: बीजेपी विधायक ए.एल. हेक ने 15 अक्टूबर को कहा कि संविधान के तहत शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन जो कोई भी कानून को अपने हाथ में लेता है, उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए, हेक ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में होने चाहिए और इनमें कोई उकसावे वाली बात या गैर-कानूनी गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
हेक ने कहा, "अगर यह संविधान के दायरे में है, तो शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति है। इसमें कोई उकसावा नहीं होना चाहिए और किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।"
शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार और गैर-कानूनी आचरण के बीच फर्क बताते हुए, बीजेपी नेता ने कहा कि लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करना चाहिए और कानून का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "हमें कानूनी दायरे और भारत के संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना चाहिए। जो कोई भी कानून को अपने हाथ में लेता है, उसे कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए।"
हेक की यह टिप्पणी जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच आई है, जिससे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
यह दोहराते हुए कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति है, विधायक ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उनकी टिप्पणी इस बात पर जोर देती है कि प्रदर्शनकारियों को कानून की सीमाओं के भीतर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए, जबकि किसी भी उल्लंघन की स्थिति में अधिकारियों को तय कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
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