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Meghalaya मेघालय: शिलांग, मेघालय में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता की सराहना करते हुए कहा कि देश की विभिन्न लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का एक मंच पर आना अखंड भारत की भावना का सुंदर प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि यही भावना भारतीय सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी ताकत भी है। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब देश के विभिन्न हिस्सों की लोक कलाएं, परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत एक साथ प्रस्तुत होती हैं, तो यह भारत की उस जीवंत संस्कृति को दर्शाती हैं, जहां विचारों की नदियां बहती हैं और मूल्यों एवं परंपराओं की हवाएं पूरे देश को एक सूत्र में बांधती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविधताओं में निहित है, जो उसे दुनिया के अन्य देशों से अलग पहचान प्रदान करती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल भी इसी सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक हैं। देश के अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और समुदायों से आने वाले सैनिक एक ही उद्देश्य के लिए कार्य करते हैं और राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। यही एकता भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाती है। उन्होंने युवाओं से देश की सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि परंपराओं और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए रखना भारत के विकास के लिए आवश्यक है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। रक्षा मंत्री ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।
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