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‘भूतिया ऑर्किड’ पूर्वोत्तर भारत में फिर से दिखाई दिया
Guwahati: यह ऑर्किड पहली बार 1850 में ब्रिटिश औपनिवेशिक botanists J.D. Hooker और Thomas Thomson द्वारा खासी पहाड़ियों से एकत्र किया गया था, और उसके बाद लगभग डेढ़ सदियों तक इसे फिर से नहीं देखा गया।
🌱 हाल ही में Botanical Survey of India (BSI) के शोधकर्ताओं — Yalatoor Mahesh, Rikertre Lytan और Ramalingam Kottaimuthu — ने इसे Upper Shillong (Lawsohtun) के जंगलों में फिर से पाया, और इसका वैज्ञानिक विवरण जर्नल Vegetos में प्रकाशित किया गया है।
🍃 विशेषताएँ — “Ghost Orchid”
यह ऑर्किड पत्तियों-रहित और बिना क्लोरोफिल वाला पौधा है, यानी यह सामान्य पौधों की तरह प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) नहीं करता।
इसके बजाय यह माइकोहेटेरोट्रोफिक जीवनशैली अपनाता है, जहाँ यह ज़मीन के भीतर फँसे फ़ंगल नेटवर्क से पोषण प्राप्त करता है।
इसका छोटा आकार और अल्प flowering अवधि इसे आसानी से नोटिस होने से बचा देता है, जिससे यह इतने लंबे समय तक “लुप्त” प्रतीत होता रहा।
⚠️ संरक्षण की चिंता
📉 शोधकर्ताओं ने पाया कि अब भी इस प्रजाति के 25 से भी कम परिपक्व व्यक्ति ही मौजूद हैं, और वे लगभग केवल 20 वर्ग मीटर के एक छोटे से हिस्से में सीमित हैं, जिससे यह Critically Endangered (गंभीर रूप से संकटग्रस्त) के करीब माना जाता है।
🌳 इसके निवास स्थान को खतरा वन क्षरण, अर्बन विस्तार और अनियंत्रित पर्यटन जैसी गतिविधियाँ पैदा कर रही हैं — जो इसकी सूक्ष्म पारिस्थितिकता और जीवनशैली के चलते इसे अधिक संवेदनशील बनाती हैं।
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