मेघालय
BJP का पूर्वोत्तर मिशन तेज मेघालय में बढ़ सकता है विधायकों का आंकड़ा
Ratna Netam
30 Aug 2026 4:15 PM IST

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मेघालय : राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर होने की चर्चा तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर दावा किया जा रहा है कि राज्य में उसका ‘ऑपरेशन लोटस’ तेजी से आगे बढ़ रहा है। विधानसभा में सिर्फ दो विधायकों वाली भाजपा अब अपनी संख्या बढ़ाकर 15 तक पहुंचाने की कोशिश में है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई विधायक भाजपा में शामिल होने की तैयारी कर सकते हैं।
मेघालय की 60 सदस्यीय विधानसभा में अगर यह राजनीतिक बदलाव होता है तो इसका असर राज्य की सत्ता के समीकरणों पर भी पड़ सकता है। हालांकि अभी तक किसी बड़े दल-बदल की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भाजपा का बढ़ता सियासी प्रभाव
पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपना संगठन मजबूत कर रही है। मेघालय में भी पार्टी लंबे समय से अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वर्तमान में भाजपा के पास विधानसभा में दो विधायक हैं, लेकिन पार्टी आने वाले चुनावों को देखते हुए अपना जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर विपक्षी दलों के विधायक भाजपा का रुख करते हैं तो इससे पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है। भाजपा पहले भी कई राज्यों में विपक्षी नेताओं को अपने साथ जोड़कर सत्ता समीकरण बदलने में सफल रही है, जिसे विपक्षी दल अक्सर ‘ऑपरेशन लोटस’ के नाम से निशाना बनाते रहे हैं।
UDP और TMC विधायकों पर नजर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के कई विधायक और तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि UDP के करीब नौ और TMC के चार विधायक पाला बदल सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो भाजपा की विधानसभा में संख्या काफी बढ़ जाएगी।
हालांकि UDP नेताओं की ओर से अभी तक इस तरह के किसी बड़े बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी के कुछ नेताओं ने ऐसी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है और किसी भी निर्णय की जानकारी आधिकारिक रूप से ही दी जाएगी।
कैबिनेट फेरबदल के बाद बढ़ी नाराजगी
मेघालय की राजनीति में असंतोष की शुरुआत गठबंधन दलों के अंदर चल रही खींचतान से जुड़ी बताई जा रही है। UDP के भीतर कैबिनेट फेरबदल को लेकर नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। इसी वजह से पार्टी के कुछ नेताओं के रुख बदलने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव से पहले अक्सर क्षेत्रीय दलों में नेतृत्व और भागीदारी को लेकर मतभेद सामने आते हैं। भाजपा ऐसे मौकों का फायदा उठाकर अपना विस्तार करने की कोशिश करती है।
अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
कुछ समय पहले UDP नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की खबरों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हुई थी। हालांकि उस मुलाकात को आधिकारिक तौर पर कई मुद्दों पर चर्चा बताया गया था, लेकिन इसके बाद से ही संभावित राजनीतिक बदलाव की अटकलें बढ़ गईं।
बताया जा रहा है कि बैठक में पूर्वोत्तर से जुड़े मुद्दों, स्थानीय अधिकारों और विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई थी। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं।
दलबदल कानून की चुनौती
अगर विधायक दल बदलते हैं तो उनके सामने दलबदल विरोधी कानून की चुनौती भी होगी। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विधायकों को अयोग्यता से बचने के लिए तय संख्या में समर्थन की जरूरत होती है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यदि पर्याप्त संख्या में विधायक एक साथ किसी पार्टी में शामिल होते हैं तो वह कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं। इसी वजह से दल-बदल की स्थिति में संख्या बल काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
2028 चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति
मेघालय में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। भाजपा अभी से राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का लक्ष्य केवल गठबंधन की राजनीति तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में अपने दम पर सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।
भाजपा नेताओं का मानना है कि पूर्वोत्तर में पार्टी का विस्तार जारी है और मेघालय भी उसके लिए महत्वपूर्ण राज्य है। वहीं विपक्षी दल भाजपा पर सत्ता विस्तार के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ करने का आरोप लगाते रहे हैं।
क्या बदलेगा मेघालय का सियासी समीकरण?
अगर UDP और TMC के विधायक भाजपा में शामिल होते हैं तो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भाजपा गठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है और आने वाले चुनावों के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकती है।
हालांकि अभी तक यह पूरा घटनाक्रम संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित है। आने वाले दिनों में ही साफ होगा कि कितने विधायक वास्तव में पाला बदलते हैं और मेघालय की राजनीति किस दिशा में जाती है।
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