मणिपुर

मणिपुर में हिंसा जारी, कांग्रेस विधायक के घर के पास ग्रेनेड धमाका

Kavita2
4 Sept 2026 4:40 PM IST
मणिपुर में हिंसा जारी, कांग्रेस विधायक के घर के पास ग्रेनेड धमाका
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इंफाल। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले करीब तीन वर्षों से जारी सांप्रदायिक संघर्ष के बीच हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में राष्ट्रपति शासन हटने और दोबारा सरकार के गठन के बाद हालात सामान्य होने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन हालिया घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायक और कांग्रेस लेजिस्लेटिव पार्टी (CLP) के नेता केलशम मेघचंद्र सिंह के घर के पास संदिग्ध हैंड ग्रेनेड से धमाका हुआ। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक धमाका गुरुवार रात करीब 8:15 बजे मणिपुर के थौबल जिले के यारीपोक इलाके के विष्णु नहा में हुआ। संदिग्ध हैंड ग्रेनेड विधायक के घर के मुख्य गेट के पास फटा। अचानक हुए विस्फोट से आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी घरों से बाहर निकल आए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बलों की टीम मौके पर पहुंची तथा इलाके को सुरक्षित करते हुए जांच शुरू की।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ग्रेनेड वहां किसने और किस उद्देश्य से रखा था। पुलिस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना के पीछे किसी संगठन या व्यक्ति की भूमिका है या नहीं।

तीन साल से जारी है संघर्ष

मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जातीय और सांप्रदायिक तनाव के कारण हिंसा की स्थिति बनी हुई है। इस संघर्ष में अब तक 306 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और राज्य के विभिन्न हिस्सों में विस्थापन की स्थिति पैदा हुई।

लंबे समय से जारी संघर्ष के चलते राज्य में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद समय-समय पर हिंसा, हमले और विस्फोट की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में विधायक के आवास के पास हुआ यह धमाका राज्य में सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंता पैदा करता है।

राष्ट्रपति शासन हटने के बाद भी चुनौती बरकरार

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाए जाने और दोबारा निर्वाचित सरकार के गठन के बाद सरकार की ओर से राज्य में स्थिति सामान्य होने की दिशा में प्रगति का दावा किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि राजनीतिक व्यवस्था बहाल होने के बाद हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा और सामान्य जनजीवन जल्द पटरी पर लौटेगा।

हालांकि, हालिया घटनाओं ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती को कायम रखा है। कांग्रेस विधायक के घर के पास हुआ धमाका यह सवाल भी खड़ा करता है कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। जनप्रतिनिधियों के आवास के आसपास सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।

विधायक के घर के गेट के पास धमाका

घटना की सबसे गंभीर बात यह है कि संदिग्ध ग्रेनेड विधायक के घर के मुख्य गेट के पास फटा। रात के समय हुए विस्फोट के कारण आसपास के लोगों में भय का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इलाके की घेराबंदी की और घटनास्थल की जांच की।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोट के लिए इस्तेमाल किया गया ग्रेनेड वहां पहले से रखा गया था या किसी ने घटना के समय उसे फेंका। इसके अलावा आसपास लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है। पुलिस घटना से पहले और बाद की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।

शांति बहाली के प्रयासों पर सवाल

मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच सरकार की प्राथमिकता शांति और सामान्य स्थिति बहाल करना रही है। राजनीतिक स्तर पर भी अलग-अलग पक्षों की ओर से बातचीत और स्थायी समाधान की जरूरत पर जोर दिया जाता रहा है। लेकिन हिंसा की छिटपुट घटनाएं शांति बहाली के प्रयासों के सामने चुनौती बनी हुई हैं।

कांग्रेस विधायक के आवास के पास धमाके की घटना ने एक बार फिर राज्य में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। विपक्ष की ओर से सरकार से घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और धमाके के पीछे की वजह तथा जिम्मेदार लोगों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के सामने चुनौती केवल इस घटना की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे घटनाक्रमों को रोकना और संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों का भरोसा बहाल करना भी महत्वपूर्ण है।

तीन साल से जारी संघर्ष में 306 लोगों की मौत और 49 लोगों के लापता होने के बीच यह धमाका इस बात की याद दिलाता है कि मणिपुर में शांति की स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। राष्ट्रपति शासन के बाद राजनीतिक प्रक्रिया बहाल होने के बावजूद जमीन पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। अब इस मामले में जांच के नतीजे और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें रहेंगी।

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