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Imphal इंफाल। गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की समय पर पहचान और जागरूकता पर जोर देते हुए त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बुधवार को कहा कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग त्रिपुरा को एक स्वस्थ, जागरूक और कल्याणकारी राज्य बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निरामय आरोग्य अभियान (एमएनएए) की शुरुआत राज्य के सभी वर्गों के लोगों को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।
मुख्यमंत्री ने इस अभियान को राज्य सरकार की एक दूरगामी और मजबूत पहल बताया। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने प्रज्ञा भवन में राज्य स्तरीय एमएनएए का उद्घाटन करने के बाद यह बात कही। यह अभियान राज्य स्वास्थ्य विभाग ने त्रिपुरा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से शुरू किया है। इस अवसर पर तपेदिक (टीबी) पर आधारित एक एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) प्रशिक्षण पायलट मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के लिए इस दिन को महत्वपूर्ण बताते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री का दायित्व संभाल रहे साहा ने कहा कि विभाग के काम में एक नया अध्याय जुड़ा है। उन्होंने कहा, “गैर-संचारी रोग (एनसीडी) पूरी दुनिया में एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। वर्तमान में भारत में लगभग 65 प्रतिशत लोग गैर-संचारी रोगों से पीड़ित हैं। देर से पहचान होने पर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और विभिन्न प्रकार के कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “कई मामलों में इन बीमारियों की समय पर पहचान नहीं हो पाती और बाद में ये गंभीर रूप ले लेती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जागरूकता बढ़ाने, बीमारियों की जल्द पहचान करने और मरीजों को इलाज से जोड़ने के लिए यह जनहितकारी और रोकथाम आधारित पहल की गई है।”
साहा ने कहा, “स्वस्थ रहने के लिए जागरूकता और अनुशासित जीवनशैली जरूरी है। राज्य सरकार समय पर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी उद्देश्य से नई स्वास्थ्य योजनाएं शुरू की जा रही हैं। जांच के आंकड़ों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष राज्य में 6.80 लाख लोगों की मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जांच की गई।
इनमें से 25,259 लोगों में मधुमेह और 49,153 लोगों में उच्च रक्तचाप की पुष्टि हुई। इसके अलावा 5.28 लाख महिलाओं की स्तन कैंसर और एक लाख महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर जांच की गई। उन्होंने कहा, “जिन लोगों में बीमारी पाई गई, उन्हें इलाज के दायरे में लाया गया और नियमित निगरानी की गई। जरूरत को देखते हुए यह अभियान तय समय सीमा में मिशन मोड में चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत गैर-संचारी रोगों की जांच, इलाज और फॉलो-अप किया जाएगा।”
एआई आधारित टीबी प्रशिक्षण मॉड्यूल के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य में आधुनिक चिकित्सा तकनीक को अपनाने का संकेत है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक के माध्यम से मानव कल्याण पर जोर दिया है। उसी सोच को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में नए और नवाचारी तरीके अपना रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के सभी स्तरों के कर्मचारियों से इन कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने में जिम्मेदारी से भूमिका निभाने की अपील की।
इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के सचिव किरण गिट्टे, त्रिपुरा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक साजू वाहिद, स्वास्थ्य निदेशक देवाश्री देबबर्मा, रोग निवारण विभाग के निदेशक अंजन दास और चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक एच. पी. शर्मा उपस्थित रहे।
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