मणिपुर

मणिपुर में फिर बिगड़े हालात, 9 मौतों के बाद प्रतिबंधात्मक आदेश

nidhi
11 Oct 2026 9:58 AM IST
मणिपुर में फिर बिगड़े हालात, 9 मौतों के बाद प्रतिबंधात्मक आदेश
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मणिपुर में 12 घंटे तक हिंसा
मणिपुर : पहाड़ी जिलों में कुकी और नगा समुदायों के बीच ताजा हिंसक घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई। करीब 12 घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। कई घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। हालात बिगड़ने के बाद कामजोंग जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान किया गया।
कुकी-नगा समुदायों के बीच बढ़ा तनाव
रिपोर्टों के मुताबिक, हिंसा की शुरुआत कामजोंग जिले के चसाद गांव में हुई। शुक्रवार, 9 अक्टूबर की रात 42 वर्षीय कुकी महिला डोमखोनेई तौथांग की गोली लगने से मौत हो गई थी। वह गांव के सुरक्षा चौकियों को हटाने की कार्रवाई के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी की चपेट में आई थीं। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और शनिवार को हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं।
इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर गोलीबारी और आगजनी हुई। अधिकारियों के मुताबिक, ताजा घटनाओं में मरने वालों में कुकी और नगा समुदायों के लोग शामिल हैं। एक गोरखा किसान की भी मौत हुई। हालांकि, सभी घटनाओं की परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं और अलग-अलग मामलों की जांच की जा रही है।
तीन जिलों में हुई हिंसा, 14 घर जलाए गए
मणिपुर के कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 24 घंटे की अवधि में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई और कम से कम 14 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। कुछ स्थानों पर दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। उखरुल जिले में एक वाहन से जा रहे व्यक्ति पर घात लगाकर हमला किए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं, अन्य घटनाओं में गांव के सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की जान गई। हमलों और आगजनी ने प्रभावित इलाकों में डर का माहौल पैदा कर दिया। हिंसा के बाद लोगों को अपने घरों और संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी। स्थानीय स्तर पर समुदायों के बीच तनाव बढ़ने से सामान्य जनजीवन पर भी असर पड़ा।
कामजोंग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कामजोंग जिला प्रशासन ने चसाद पुलिस स्टेशन के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा को फैलने से रोकने के लिए कदम उठाए। हिंसा प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया।
कांगपोकपी जिले में समिति ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) की ओर से 24 घंटे के बंद का आह्वान भी किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर अनिश्चितकालीन बंद की घोषणा से परिवहन और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई। यह राजमार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। प्रशासन के सामने प्राथमिक चुनौती हिंसा को रोकना, प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संवेदनशील इलाकों में हालात सामान्य बनाना है।
हिंसा के पीछे के कारणों की जांच
ताजा घटनाओं के बाद कुकी और नगा समुदायों के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, फरवरी 2026 से दोनों समुदायों के बीच जारी संघर्ष में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, लेकिन ताजा हिंसा को पिछले कई महीनों की सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल किया जा रहा है।
कुछ स्थानीय संगठनों ने हिंसा के लिए सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, अधिकारियों ने हमलों के पीछे शामिल लोगों की पहचान को लेकर अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए किसी एक समूह को सभी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराना अभी उचित नहीं होगा। जांच एजेंसियों को अलग-अलग गोलीबारी, हमलों और आगजनी की घटनाओं के बीच संबंधों का पता लगाना है। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि किस घटना में कौन शामिल था और हिंसा किस तरह एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक फैली।
शांति बहाली प्रशासन की प्राथमिकता
मणिपुर में ताजा हिंसा ने एक बार फिर प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और शांति बहाली की चुनौती सामने ला दी है। नौ लोगों की मौत और घरों को जलाए जाने से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। हिंसा के कारण लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है और सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ा है।
ऐसे हालात में प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, घायलों को सहायता, संपत्ति के नुकसान का आकलन और दोषियों की पहचान महत्वपूर्ण है। साथ ही, समुदायों के बीच तनाव कम करने और अफवाहों को रोकने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई भी जरूरी है। फिलहाल कामजोंग में प्रतिबंधात्मक आदेश और कांगपोकपी में बंद की घोषणा के बीच स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही हमलों के पीछे की पूरी वजह और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
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